चंडीगढ़ इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन-स्टेट सपोर्ट मिशन (CIT-SSM), नीति आयोग ने आज शहर के युवाओं में स्टीटॉटिक लिवर डिजीज (फैटी लिवर) के प्रति जागरूकता, समय पर पहचान और रोकथाम के लिए ‘लिवर सेफ चंडीगढ़ पहल’ की शुरुआत की। इस अभियान की शुरुआत पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर 11, चंडीगढ़ में आयोजित ‘स्वस्थ लिवर, स्वस्थ जीवन: स्टीटॉटिक लिवर रोग को समझना और रोकथाम’ विषय पर एक सेमिनार के दौरान की गई।
इस पहल का उद्देश्य फैटी लिवर की समस्या को रोकने के लिए कॉलेजों और समाज के बीच लिवर स्वास्थ्य का संदेश पहुंचाना है, जिसमें शुरुआती जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जाएगा।
सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल विशेष सचिव (वित्त) श्रीमती अनुराधा चागती ने औपचारिक रूप से इस अभियान की शुरुआत की। उन्होंने समय पर रोकथाम और उचित कदमों के जरिए लिवर की बीमारियों से निपटने के लिए नीति निर्माताओं, प्रशासकों और चिकित्सा विशेषज्ञों के आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
इस सेमिनार का आयोजन CIT-SSM द्वारा उच्च शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य सेवा विभाग (चंडीगढ़ प्रशासन) और पीजीआईएमईआर (PGIMER) के हेपेटोलॉजी विभाग के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, पीजीआई के लिवर रोग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
स्वास्थ्य सेवा विभाग की कार्यक्रम अधिकारी (NP-NCD) डॉ. निधि ने युवाओं में लिवर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और जरूरी चिकित्सीय उपायों को जमीनी स्तर पर लागू करने में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर बात रखी।
तकनीकी सत्र के दौरान, पीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. अजय दुसेजा ने फैटी लिवर के बढ़ते मामलों पर चर्चा की। वहीं अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. निपुण वर्मा ने इस बीमारी के बढ़ने के कारणों और बिना किसी चीर-फाड़ वाली आधुनिक जांच तकनीकों (नॉन-इनवेसिव तरीकों) से समय पर पहचान के बारे में बताया। इसके अलावा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्क डे ने इसके इलाज और रोकथाम पर चर्चा करते हुए संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और चीनी का सेवन कम करने पर जोर दिया।
यह पहल चंडीगढ़ के युवाओं में आसानी से रोकी जा सकने वाली इस लिवर बीमारी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने, स्वस्थ आदतें विकसित करने और समय पर जांच को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े शहरव्यापी अभियान की शुरुआत है।


