* पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने आज पंजाब लोक भवन में वेटलैंड अथॉरिटी, चंडीगढ़ की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय महत्व के सुखना वेटलैंड के संरक्षण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की समीक्षा की।
बैठक की शुरुआत वेटलैंड अथॉरिटी की चौथी बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा से हुई। इस दौरान वेटलैंड अथॉरिटी, यूटी चंडीगढ़ के आधिकारिक लोगो को भी अंतिम रूप दिया गया। विभिन्न संबंधित विभागों द्वारा सुखना वेटलैंड तथा उसके कैचमेंट क्षेत्र के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन के लिए किए जा रहे कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। बैठक में कांसल डायवर्जन नहर के रखरखाव तथा उपयुक्त मृदा एवं नमी संरक्षण उपायों के माध्यम से मृदा अपरदन को रोकने के लिए व्यापक अध्ययन कराने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।
संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने सुखना वेटलैंड तथा उसके कैचमेंट क्षेत्र के समग्र एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया ताकि इसकी दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वित दृष्टिकोण अपनाते हुए वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा तथा जैव विविधता संरक्षण को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।
प्रशासक ने वेटलैंड में खरपतवार प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं सतत तरीकों को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया ताकि जलीय जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
सुखना वेटलैंड में आने वाले प्रवासी पक्षियों में विशेष रुचि व्यक्त करते हुए प्रशासक ने उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली तथा संबंधित विभागों को प्रवासी पक्षियों की अधिक विविधता एवं संख्या आकर्षित करने के लिए उनके प्राकृतिक आवास की गुणवत्ता में सुधार हेतु उपयुक्त उपाय तलाशने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वेटलैंड के आसपास उपयुक्त स्थानों पर विभिन्न प्रवासी पक्षियों की जानकारी दर्शाने वाले सूचना पैनल स्थापित किए जाएं ताकि आगंतुकों में जागरूकता बढ़े तथा प्रकृति शिक्षा को प्रोत्साहन मिल सके।
बैठक में वेटलैंड अथॉरिटी को सुखना वेटलैंड के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रबंधन संबंधी प्रयासों की जानकारी दी गई। पंजाब विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा किए गए व्यापक मत्स्य विविधता सर्वेक्षण में 20 से अधिक मछली प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जिनमें मृगल कार्प (Cirrhinus mrigala) सबसे अधिक पाई गई। सर्वेक्षण के अनुसार कुल मत्स्य विविधता में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी देशी प्रजातियों की है। वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर मत्स्य विभाग द्वारा देशी मत्स्य संसाधनों को सुदृढ़ करने के लिए कतला, रोहू एवं मृगल की 10,000 फिंगरलिंग्स छोड़ी गई हैं।
मुख्य वन संरक्षक ने अथॉरिटी को अवगत कराया कि आईआईटी रुड़की की सिफारिशों तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के परामर्श के अनुसार वेटलैंड के रेगुलेटरी छोर पर वैज्ञानिक तरीके से गाद निकासी (डी-सिल्टिंग) का कार्य जारी है। इस परियोजना से सुखना वेटलैंड की जल भंडारण क्षमता में लगभग 5.4 हेक्टेयर-मीटर की वृद्धि होने की संभावना है।
बैठक में यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव श्री एच. राजेश प्रसाद, राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री वी. पी. सिंह, वन सचिव श्री मंदीप सिंह बराड़, शहरी नियोजन सचिव श्री दीप्रवा लाकड़ा, मुख्य वन संरक्षक श्री सौरभ कुमार, ग्रामीण विकास सचिव श्री अमित कुमार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिरीक्षक श्री राजा राम, पर्यटन सचिव श्री सैयद आबिद राशिद शाह, वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्री अनुप कुमार सोनी, मत्स्य सचिव श्री प्रदीप कुमार, मुख्य अभियंता श्री सी. बी. ओझा तथा पंजाब विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


