सूक्ष्मजीव प्रौद्यागिकी संस्थान (सीएसआईआर-इमटैक), चंडीगढ़ ने आज अपने सेक्टर 39A परिसर में वन महोत्सव 2026 मनाया। इसके तहत चंडीगढ़ प्रशासन के वन एवं वन्यजीव विभाग के सहयोग से पौधारोपण अभियान चलाया गया, जिससे पर्यावरण की स्थिरता और पारिस्थितिक संरक्षण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया गया।
इस वृक्षारोपण अभियान का नेतृत्व सीएसआईआर-इमटैक की निदेशक डॉ. अलका राव ने बागवानी प्रभाग के प्रभारी डॉ. सचिन राउत के साथ किया। इस कार्यक्रम में सीएसआईआर-इमटैक के वैज्ञानिकों, तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ़ के साथ-साथ शोधार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वन महोत्सव के दौरान, जैव-विविधता को बढ़ावा देने, परिसर में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण की देखभाल के महत्व को रेखांकित करने के लिए कई तरह के देशी और वानस्पतिक पौधे लगाए गए। यह वृक्षारोपण अभियान राष्ट्रीय अभियान “एक पेड़ माँ के नाम” का भी समर्थन करता है, जो मातृत्व और प्रकृति के बीच पालन-पोषण के बंधन का प्रतीक है।
इस मौके पर सीएसआईआर-इमटैक के निदेशक डॉ. अलका राव ने सभा को संबोधित करते हुए प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी के संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वन महोत्सव हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा और देखभाल करने के हमारे सामूहिक कर्तव्य की याद दिलाता है। उन्होंने संस्थान के सभी सदस्यों को संधारणीय तौर-तरीकों में सक्रिय रूप से योगदान देने और वृक्षारोपण को केवल एक बार की गतिविधि के बजाय एक निरंतर सामुदायिक प्रयास बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
सीएसआईआर-इमटैक ने अपने सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए, पौधे उपलब्ध कराने और कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने के लिए श्री सौरभ कुमार (आईएफ़एस, मुख्य वन संरक्षक, वन एवं वन्यजीव विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन); भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), चंडीगढ़; सीआईआई-इंडियन विमेन नेटवर्क (आईडब्ल्यूएन) चंडीगढ़ ट्राइसिटी चैप्टर; और जेड एक्सक्लूसिव चंडीगढ़ के सहयोग की सराहना की।
सीएसआईआर-इमटैक सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक राष्ट्रीय केंद्र है और इसकी स्थापना 1984 में हुई थी। इमटैक का दृष्टिकोण और मिशन बुनियादी खोजों से मज़बूत एक अनुवादकीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है और क्रमशः अत्याधुनिक प्रक्रियाओं एवं प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा तथा औद्योगिक क्षेत्र की अपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करना है।


