भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), चंडीगढ़ ने 02-03 सितम्बर, 2026 को कुरुक्षेत्र, हरियाणा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए बैंकर्स की वित्तपोषण क्षमता निर्माण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय मिशन (NAMCABS) कार्यशाला आयोजित की।
इस वर्कशॉप का उद्घाटन श्री पंकज सेतिया, जनरल मैनेजर, ऑफिसर-इन-चार्ज, आरबीआई, चंडीगढ़ ने किया। इस मौके पर क्षेत्र के प्रमुख बैंकों के सीनियर अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें पंजाब नेशनल बैंक के CGM श्री आशीष कुमार चतुर्वेदी, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के GM श्री बिनोद कुमार सिन्हा, HDFC बैंक के ज़ोनल हेड श्री धीरज सेठी और हरियाणा ग्रामीण बैंक के GM श्री वेद प्रकाश शामिल थे। इस वर्कशॉप में हरियाणा के अंबाला, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर ज़िलों के 21 अलग-अलग बैंकों के लगभग 80 बैंकर शामिल हुए, जो MSME को लोन देने का काम देखते हैं।
श्री पंकज सेतिया ने अपने मुख्य भाषण में यह रेखांकित किया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की वृद्धि और रोजगार सृजन में बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यह कार्यशाला भागीदारों के लिए उत्तम पद्धतियों, नीतिगत दिशानिर्देशों तथा एमएसएमई वित्तपोषण के नवीन दृष्टिकोणों के संबंध में अपनी जानकारी अद्यतन करने का एक अवसर है। उन्होंने बैंकरों से आह्वान किया कि वे अधिक संवेदनशील एवं उद्यममित्र दृष्टिकोण अपनाएँ, विशेषतया वर्तमान वैश्विक परिवेश में, जहाँ स्थानीय विनिर्माण को सुदृढ़ करना सन् 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों का संचालन आरबीआई, सिडबी, एमएसएमई डीएफओ और ट्रांसयूनियन सिबिल के विषय-विशेषज्ञों तथा वाणिज्यिक बैंकों के अनुभवी संकाय सदस्यों द्वारा किया गया। इन सत्रों में एमएसएमई ऋण आकलन, जोखिम प्रशमन, फिनटेक समाधान और नियामक स्तर पर हुए परिवर्तनों के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।
बैंकरों ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु रिजर्व बैंक की पहल की सराहना व्यक्त की तथा उन्होंने बताया कि प्राप्त ज्ञान से उन्हें व्यावहारिक स्तर पर लाभक्षम एमएसएमई इकाइयों को अधिक प्रभावी ढंग से सहयोग प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
NAMCABS कार्यशाला को बैंकरों को उद्यमिता को पोषित करने, औपचारिक वित्त तक पहुँच का विस्तार करने और एमएसएमई क्षेत्र की सतत वृद्धि को गति देने हेतु अपेक्षित व्यावहारिक अंतर्दृष्टि एवं उपकरणों से सुसज्जित करने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


