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    Home»Chandigarh»पीजीआईएमईआर ने उत्कृष्टता के 63 वर्ष पूरे किए, एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य का विजन प्रस्तुत किया
    Chandigarh

    पीजीआईएमईआर ने उत्कृष्टता के 63 वर्ष पूरे किए, एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य का विजन प्रस्तुत किया

    September 7, 2026Updated:September 7, 20268 Mins Read
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    “पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ वास्तव में एक राष्ट्रीय धरोहर है; एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन्हें सशक्त बनाकर स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा” — प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, माननीय कुलपति, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

    “पीजीआईएमईआर की बढ़ती क्षमता और मरीजों का निरंतर विश्वास संस्थान के राष्ट्रीय नेतृत्व को दर्शाता है” — प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर

    चंडीगढ़: पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के 63वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन NINE ऑडिटोरियम में किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, माननीय कुलपति, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्वास्थ्य सेवाओं में मूलभूत परिवर्तन लाएगा और डॉक्टरों की क्षमताओं को बढ़ाकर उन्हें अधिक ज्ञान, दक्षता और व्यापक पहुंच प्रदान करेगा।

    स्थापना दिवस समारोह में डॉ. अलका राव, निदेशक, IMTECH चंडीगढ़; प्रो. योगेश चावला, पूर्व निदेशक, पीजीआईएमईआर; प्रो. संजय जैन, डीन (अकादमिक्स); प्रो. संजीव हांडा, डीन (रिसर्च); प्रो. अशोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक-सह-प्रमुख, अस्पताल प्रशासन विभाग; श्री रविंदर सिंह, वित्तीय सलाहकार, पूर्व एवं वर्तमान डीन, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी तथा पीजीआईएमईआर परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

    “एआई इन हेल्थकेयर” पर मुख्य संबोधन

    स्थापना दिवस के अवसर पर “एआई इन हेल्थकेयर” विषय पर मुख्य संबोधन देते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने पीजीआईएमईआर को “एक सच्ची राष्ट्रीय धरोहर” बताया और स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में संस्थान के अग्रणी योगदान की सराहना की।

    प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, “पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ निस्संदेह एक सच्ची राष्ट्रीय धरोहर है। इसका योगदान केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। मैं पीजीआईएमईआर परिवार के प्रत्येक सदस्य को इस शानदार यात्रा और भारतीय स्वास्थ्य सेवा को अग्रणी बनाए रखने के लिए बधाई देता हूं।”

    उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एआई को चिकित्सा पेशेवरों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनकी क्षमताओं को बढ़ाने वाले साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “आज स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के सबसे सफल उपयोग डॉक्टरों को हटाने के उदाहरण नहीं हैं, बल्कि ऐसे उदाहरण हैं जहां एआई डॉक्टरों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद कर रहा है।”

    बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि एआई अब केवल एक तकनीकी आकर्षण नहीं रह गया है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में गहराई से प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा, “एआई अब कोई फैशनेबल खिलौना या स्टेटस सिंबल नहीं है। यह बाजार और स्वास्थ्य सेवाओं में गहराई से प्रवेश कर चुका है और स्वाभाविक रूप से हम इससे दूरी बनाकर नहीं रह सकते।”

    उन्होंने बताया कि एआई बड़ी मात्रा में चिकित्सा संबंधी जानकारी का विश्लेषण करने में डॉक्टरों की सहायता कर सकता है। यह क्लिनिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी रिपोर्ट और वैज्ञानिक साहित्य से आवश्यक जानकारी निकालने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, “यह सहायक विशेषज्ञता का स्थान नहीं लेता, बल्कि उस ज्ञान की मात्रा को कई गुना बढ़ा देता है जिसका डॉक्टर प्रभावी रूप से उपयोग कर सकता है।”

    चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, “वास्तविक बदलाव यह है कि अब शोधकर्ता ऐसे प्रश्न पूछ सकते हैं, जिनकी जांच करना पहले बहुत महंगा या अत्यधिक समय लेने वाला होता था।”
    भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एआई विकसित करने की आवश्यकता

    प्रो. चतुर्वेदी ने भारतीय स्वास्थ्य सेवा की वास्तविकताओं को ध्यान में रखे बिना एआई को अपनाने के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के डेटा पर प्रशिक्षित एआई सिस्टम भारतीय रोग-प्रवृत्तियों, मरीजों की आबादी और चिकित्सा पद्धतियों को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं कर सकते।

    उन्होंने जोर दिया कि भारत को केवल हेल्थकेयर एआई का उपभोक्ता बने रहने के बजाय भारतीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने वाला देश बनना होगा।

    उन्होंने दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं, रेडियोलॉजी, अस्पताल प्रबंधन और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में एआई की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। हालांकि, उन्होंने कहा कि सर्जरी जैसे जटिल शारीरिक कार्य अभी भी एआई के लिए आगे के विकास का क्षेत्र हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में चिकित्सा शिक्षा का अधिक ध्यान केवल तथ्यों को याद करने के बजाय क्लिनिकल निर्णय क्षमता, साक्ष्यों के मूल्यांकन, आलोचनात्मक सोच और मरीजों के साथ प्रभावी संवाद पर केंद्रित होगा।

    अपने संबोधन के समापन पर प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, “एआई की पहली पीढ़ी ने इंसानों को जानकारी खोजने में मदद की। अगली पीढ़ी इंसानों को निर्णय लेने में मदद कर रही है। और उसके बाद आने वाली पीढ़ी इंसानों को कार्रवाई करने में मदद करेगी।”

    पीजीआईएमईआर की बढ़ती क्षमता और मरीजों का विश्वास

    इससे पहले पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान के उल्लेखनीय विस्तार, बढ़ती मरीज क्षमता, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की पहलों और लगातार घटती वेटिंग लिस्ट पर प्रकाश डाला।

    हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दो प्रमुख केंद्रों के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “प्रधानमंत्री ने 17 जुलाई को दो प्रमुख केंद्रों का उद्घाटन किया, जो हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि और प्रोत्साहन था। एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर से सीधे 800 बेड की क्षमता बढ़ी है। पहले हमारे पास 2,200 बेड थे और अब मरीजों की देखभाल के लिए हमारे पास 3,000 बेड हैं।”

    किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति पीजीआईएमईआर की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “हम यह नहीं देखते कि हमने पांच लाख रुपये खर्च किए हैं। हम यह नहीं देखते कि हमने कितने करोड़ रुपये की बचत कराई है।”

    विश्व के अग्रणी संस्थानों में पीजीआईएमईआर की स्थिति पर बात करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “मैं पीजीआई को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक मानता हूं। मैं यह नहीं कहूंगा कि यहां सब कुछ 100 प्रतिशत ठीक है, लेकिन हमारे बुनियादी ढांचे और मरीजों के विश्वास को देखते हुए, मुझे लगता है कि हम दुनिया के कई शीर्ष संस्थानों से बहुत आगे हैं।”

    पीजीआईएमईआर के निदेशक ने संस्थान की निरंतर प्रगति का श्रेय समर्पित कार्यबल को दिया और बुनियादी ढांचे, डायग्नोस्टिक सेवाओं, मानव संसाधन तथा उभरते स्वास्थ्य संस्थानों के साथ सहयोग को मजबूत करने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।

    उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों के लिए किफायती बनाने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. लाल ने आयुष्मान भारत के माध्यम से मरीजों को मिल रहे लाभ तथा अमृत फार्मेसी आउटलेट्स के माध्यम से उपलब्ध किफायती जेनेरिक दवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के इलाज में मरीजों को होने वाली बचत करोड़ों रुपये में है।

    बढ़ते मरीजों के दबाव के बावजूद सेवा वितरण में सुधार का उल्लेख करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “आपने देखा होगा कि हमारी वेटिंग लिस्ट दिन-प्रतिदिन कम हो रही है। मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन वेटिंग लिस्ट कम हो रही है। इसका मतलब है कि पीजीआई सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

    संस्थागत सहयोग, विशेष रूप से बीएचयू के साथ सहयोग के बारे में उन्होंने कहा, “बीएचयू के लिए हम हर प्रकार की सहायता का वादा करते हैं। आप बस बताइए और हम उसे पूरा करेंगे। हमें केंद्रों की मदद करने और उन्हें मार्गदर्शन देने में बहुत खुशी होगी।”

    35 कर्मचारियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया

    समारोह के दौरान मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, पीजीआईएमईआर निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन (अकादमिक्स) प्रो. संजय जैन तथा डीन (रिसर्च) प्रो. संजीव हांडा द्वारा संस्थान के 35 कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।

    सम्मानित कर्मचारियों की सूची:

    1. श्री अलेल सिंह नेगी, हॉस्पिटल अटेंडेंट, हिस्टोपैथोलॉजी
    2. श्री सुशील कुमार, हॉस्पिटल अटेंडेंट, ट्रेनिंग ब्रांच
    3. श्री भूराम सिंह, हॉस्पिटल अटेंडेंट, साइटोलॉजी एवं गाइनी पैथोलॉजी
    4. श्री सते सिंह, हॉस्पिटल अटेंडेंट, फिजियोथेरेपी
    5. श्री प्रताप चंद, हॉस्पिटल अटेंडेंट, जनरल ब्रांच
    6. श्री दुर्गा सिंह, हॉस्पिटल अटेंडेंट, कार्यालय उप निदेशक (प्रशासन)
    7. श्री किरण पाल, एमटीएस (सैनिटेशन), वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय
    8. श्री विनोद कुमार, एमटीएस (सैनिटेशन), फॉरेंसिक मेडिसिन
    9. श्री धन सिंह, एमटीएस (सैनिटेशन), सेंट्रल एनिमल हाउस
    10. श्री दीपक, एमटीएस (सैनिटेशन), मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी
    11. श्री सोनू, एमटीएस (सैनिटेशन), मेडिकल रिकॉर्ड विभाग
    12. श्री काली दास, माली, इंजीनियरिंग विभाग
    13. श्री राजिंदर सिंह, वर्क इंस्पेक्टर, इंजीनियरिंग विभाग
    14. श्री सुरिंदर कुमार, सिक्योरिटी गार्ड, सुरक्षा विभाग
    15. श्री परमजीत सिंह, असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, जनरल ब्रांच
    16. श्री अशोक कुमार, जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-I
    17. श्री रवजीत सिंह, सीनियर लैब टेक्नीशियन, बायोकेमिस्ट्री
    18. सुश्री ललिता अरोड़ा, टेक्निकल असिस्टेंट, हेपेटोलॉजी
    19. श्री अश्विनी कुमार, सीनियर लैब टेक्नीशियन, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी
    20. मनदीप सैनी सीनियर लैब टेक्नीशियन, पल्मोनरी मेडिसिन
    21. श ओमिंदर कुमार , प्राइवेट सेक्रेटरी, पीडियाट्रिक्स
    22. रजनी गुप्ता, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, पल्मोनरी मेडिसिन
    23. सुश्री रीता ऑफिशिएटिंग DNS, नर्सिंग (इन्फेक्शन कंट्रोल)
    24. सुश्री ज्योति ,सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी एवं मेडिकल ऑन्कोलॉजी
    25. सुश्री मनप्रीत कौर नर्सिंग ऑफिसर, APC PICU
    26. सुश्री रजनी नर्सिंग ऑफिसर, रीनल ट्रांसप्लांट OT
    27. श्री राजेश, नर्सिंग ऑफिसर, पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी वार्ड
    28. श्री ललित चंद्र पंत जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-II
    29. श्री सचिन शर्मा सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-II
    30. सुश्री श्वेता, सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-II
    31. विवेक कुमार, सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-II
    32. सुश्री सुरभि शर्म, जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-I
    33. सौरभ शर्मा, जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-II
    34. अंबिका सैनी एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-I एवं II
    35. आनंद यादव असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, रिक्रूटमेंट सेल

    समारोह के अंत में प्रो. संजीव हांडा, डीन (रिसर्च), पीजीआईएमईआर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और इसके साथ स्थापना दिवस समारोह का औपचारिक समापन हुआ।

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