*पूर्व कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह चौटाला की प्रेस कॉन्फ्रेंस*
रणजीत सिंह चौटाला ने पंचकूला स्थित रेड बिशप में की पीसी
रणजीत सिंह सिंह चौटाला ने तथ्यों के साथ अभय चौटाला के उस बयान पर पलटवार किया जिसमें उन्होंने सरकार गिराने के आरोप लगाए है
*पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल की सरकार को कई बार गिरने के अभय चौटाला के आरोपो को रणजीत सिंह चौटाला ने निराधार बताया है*
रणजीत चौटाला ने कहा अभय सिंह चौटाला ने आरोप लगाए हैं 1982 औऱ 1987 में चौधरी देवीलाल और 1991 में चौधरी देवीलाल की सरकार गिराने के लिए रणजीत चौटाला ने पैसे लिए थे
रणजीत सिंह चौटाला ने कहा मैं राजनीति में में पहली बार 1987 में आया था फिर उसके बाद विधायक बना था
रणजीत सिंह चौटाला ने कहा 1982 में मैं विधायक ही नहीं था
*रणजीत सिंह चौटाला ने कहा अभय सिंह चौटाला ने IB के पूर्व चीफ़ मलोय कृष्ण धर की किताब “ओपन सीक्रेट” का हवाला दे रहे हैं, जबकि उस किताब में ये जानकारी पूरी तरीके से गलत छपी हुई है*
इस ओपन सीक्रेट किताब में दावा किया गया है 1987 में देवीलाल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मुलाकात हुई थी जबकि इंदिरा गांधी की हत्या 1984 में हो चुकी थी
रणजीत सिंह चौटाला ने कहा जब इंद्रा गाँधी की हत्या पहले ही हो चुकी थी ऐसे में 1987 मुलाकात कैसे हो सकती है
किताब में चौधरी देवीलाल और इंदिरा गांधी के लिफ्ट में मिलने कि बात कही गई है जिसके पीछे हरियाणा में चौधरी देवीलाल कि आगामी जीत को रोकना बताया गया है — रणजीत सिंह चौटाला
इस किताब में मेरा बनारसी दास गुप्ता और खुर्शीद अहमद का जिक्र है
*रणजीत चौटाला ने कहा 1987 से पहले हम तीनों हाउस के सदस्य ही नहीं थे*
किताब में दावा किया गया है उस वक्त एनटी रामा राव की दक्षिण भारत और हरियाणा में देवीलाल की आंधी चल रही थी
हरियाणा में चौधरी देवीलाल की आंधी रोकने के लिए पूर्व इंटेलिजेंट ब्यूरो धर की जिम्मेवारी लगाई गई थी
रणजीत सिंह चौटाला ने कहा 1984 और 1987 में कोई भी विधायक नहीं बिका था
महम कांड के चलते दबाव में ओपी चौटाला को इस्तीफा देना पड़ा था — रणजीत सिंह चौटाला
रणजीत चौटाला ने कहा तब तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने चौधरी देवीलाल को नैतिकता के नाम पर ओमप्रकाश चौटाला से इस्तीफा देने को कहा था इसके बाद बनारसी दास गुप्ता हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे
इसके 4 महीने के बाद ओम प्रकाश चौटाला दोबारा हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे और इसके बाद हुकुम सिंह को सीएम बनाया गया वे साढ़े तीन महीने रहे और उसके फिर ओम प्रकाश चौटाला सीएम बने थे और विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले त्यागपत्र दे दिया था
रणजीत सिंह चौटाला ने कहा 1982 में चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल जब एक साथ थे उस वक्त लोकदल के 6 विधायक थे जिनको ओम प्रकाश चौटाला ने खुद चुनाव हरवाया था
इसी के चलते 1982 में कांग्रेस की 36 सीट आई थी और लोकदल की 34 सीट आई थी और बहुमत लोकदल को नहीं मिला था
रणजीत चौटाला ने 1982 में लोकदल के 6 विधायक जो चौधरी चरण सिंह ग्रुप के थे उनमें ओम प्रकाश राणा , सतबीर मलिक ,बलबीर ग्रेवाल ,कंवल सिंह , ओमप्रकाश बेरी औऱ चंद्रावती थे जिनको ओपी चौटाला ने ही हरवाया था जिसके चलते चौधरी देवीलाल को बहुमत नही मिला था– रणजीत सिंह चौटाला
देश के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों को बिना तथ्यों सहित ऐसी किताबें नहीं लिखनी चाहिए — रणजीत सिंह चौटाला
रणजीत सिंह चौटाला ने कहा अभय चौटाला ने उन पर जो आरोप लगाए है वो पूरी तरह बेबुनियाद है


