जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा “जागृति” योजना के अंतर्गत “सुरक्षित भारत, सुरक्षित भविष्य” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पॉक्सो मामलों से संबंधित चंडीगढ़ पुलिस के एसएचओ, जांच अधिकारियों एवं इंस्पेक्टरों के लिए आयोजित की गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करना था।
प्रथम सत्र में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ के सदस्य सचिव श्री अरुण कुमार अग्रवाल ने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए एसएलएसए एवं डीएलएसए द्वारा संचालित विभिन्न विधिक जागरूकता एवं पीड़ित सहायता योजनाओं की जानकारी दी।
द्वितीय सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग की प्रोफेसर डॉ. ज्योति रतन ने पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों, प्रक्रियाओं एवं कानूनी पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
तृतीय सत्र में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, चंडीगढ़ के विधि अधिकारी श्री राजेश्वर सिंह ने प्रतिभागियों को विक्टिम मुआवजा योजना के बारे में जानकारी देते हुए इसके अंतर्गत उपलब्ध लाभों एवं प्रक्रिया को समझाया।
चतुर्थ सत्र में बाल कल्याण समिति, चंडीगढ़ की अध्यक्षा डॉ. गुरप्रीत कौर ने पॉक्सो मामलों में बाल कल्याण समिति एवं चाइल्ड केयर संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
अंतिम सत्र में पॉक्सो कोर्ट की पीठासीन अधिकारी डॉ. याशिका एवं लोक अभियोजक सुश्री मनिंदर कौर ने पुलिस अधिकारियों के साथ संवाद करते हुए पॉक्सो मामलों की जांच एवं सुनवाई के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ के सचिव-सह-मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री सुनील कुमार एवं कार्यक्रम समन्वयक श्री शिव कुमार शर्मा सभी सत्रों में उपस्थित रहे।
श्री सुनील कुमार ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को बाल संरक्षण कानूनों के प्रति संवेदनशील बनाना तथा पुलिस, बाल कल्याण समिति, विधिक सेवा प्राधिकरण एवं न्यायालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि पॉक्सो अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रतिभागियों द्वारा कार्यशाला को सराहा गया। यह कार्यक्रम बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं न्याय सुनिश्चित करने हेतु एक समन्वित एवं संवेदनशील व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।



