हरियाणा सरकार द्वारा आमजन की सुविधा के लिए अधिकांश सरकारी सेवाएं तथा प्रमाण पत्र घर बैठे ऑनलाइन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। पेपरलैस, फेसलैस तथा कैशलैस सेवाओं के माध्यम से प्रदेश सरकार सुशासन की दिशा में निरन्तर अग्रसर है। हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण के माध्यम से अब तक विभिन्न विभागों के लगभग 2 करोड़ 36 लाख प्रमाण पत्र एवं सेवाएं नागरिकों को घर बैठे उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि जून, 2020 में आरम्भ की गई परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना के अंतर्गत प्रदेश के परिवारों से संबंधित एक विश्वसनीय डेटाबेस तैयार किया गया है, जिसके आधार पर राज्य की भावी विकास नीतियां निर्मित की जा सकेंगी तथा पात्र नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ घर बैठे सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक पंजीकृत परिवार को एक विशिष्ट परिवार पहचान संख्या प्रदान की जाती है।
*2.36 करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र एवं सेवाएं जारी*
नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रिड) के आयुक्त एवं सचिव श्री जे. गणेशन ने बताया कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अक्तूबर, 2021 में हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण का गठन किया गया, जो परिवार पहचान संख्या जारी करने तथा परिवार सूचना डेटा भंडार के विकास, संशोधन एवं रखरखाव सम्बंधी कार्य सुनिश्चित करता है।
प्राधिकरण के डेटा के आधार पर अब तक नागरिकों को लगभग 37+ लाख आय प्रमाण पत्र, 21+ लाख पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, 23+ लाख अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, 8.5 लाख अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, 39.76 लाख सार्वजनिक वितरण प्रणाली राशन कार्ड तथा 82 लाख पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
इसी प्रकार, 9.7 लाख वृद्धावस्था सम्मान पेंशन, 93 हजार विधवा पेंशन, 11.21 लाख लाडो लक्ष्मी योजना, 56 हजार दिव्यांग पेंशन, 1 लाख विधुर एवं अविवाहित पेंशन, 1.23 लाख विवाह शगुन योजना, 16 हजार आपकी बेटी हमारी बेटी योजना तथा 57 हजार से अधिक दयालु योजना के लाभार्थियों को पंजीकृत कर आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।
*पीपीपी से 50 से अधिक विभाग जुड़े*
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार का परिवार पहचान पत्र प्लेटफॉर्म देश का अपनी तरह का सबसे अनूठा प्रयोग है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी 23 जिलों में कुल 77,41,912 परिवारों के 2,98,47,359 सदस्यों को पंजीकृत किया जा चुका है। पीपीपी प्लेटफॉर्म के साथ 50 से अधिक विभाग जुड़े हुए हैं, जिनकी 400 से अधिक योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ इसी डेटाबेस के आधार पर पात्र नागरिकों को उपलब्ध करवाया जा रहा है।
प्राधिकरण के माध्यम से नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं तक पहुंच सुगम हुई है। यह व्यवस्था जन्म, मृत्यु एवं विवाह सम्बंधी अभिलेखों से लिंक होने के कारण डेटा के स्वतः संशोधन को भी सुनिश्चित करती है।
*पीपीपी 2.0 – बेहतर से सर्वश्रेष्ठ की ओर अग्रसर*
उन्होंने अवगत कराया कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के दिशा-निर्देशानुसार विभाग द्वारा शीघ्र ही पीपीपी 2.0 तैयार किया जाएगा, जो वर्तमान पीपीपी प्लेटफॉर्म के उन्नत आर्किटेक्चर पर आधारित होगा। यह प्रणाली विद्यमान व्यवस्था को और अधिक सशक्त, सहज एवं नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीपीपी 2.0 के अंतर्गत उपयोगकर्ता-अनुकूल मोबाइल एप्लीकेशन भी उपलब्ध करवाई जाएगी, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों के मध्य डेटा का सुगम आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा तथा सभी विभागों में एकल पहचान की व्यवस्था स्थापित हो सकेगी। इससे डुप्लीकेसी समाप्त होगी और पात्र नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक शीघ्रता एवं पारदर्शिता से पहुंच सकेगा।
*आधार की तर्ज़ पर तैयार किए जाएंगे पीपीपी स्मार्ट कार्ड*
उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा नागरिकों को पीपीपी स्मार्ट कार्ड भी उपलब्ध करवाए जाएंगे, जो आधार की तर्ज़ पर तैयार किए जाएंगे तथा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं तक पहुंच का एकल स्रोत बनेंगे। इस कार्ड के माध्यम से क्यूआर आधारित त्वरित प्रमाणीकरण सम्भव होगा, जिससे विभिन्न विभागों में टैप के माध्यम से ही सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी और कागजी अथवा मैनुअल खोज की आवश्यकता नहीं रहेगी।
इस कार्ड में पहचान सम्बंधी समस्त आवश्यक डेटा समाहित होगा तथा यह धोखाधड़ी पर नियंत्रण का सशक्त आधार सिद्ध होगा।


