वन एवं वन्यजीव विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से 20 नवंबर से 27 नवंबर 2025 तक सुखना वन्यजीव अभयारण्य एवं चंडीगढ़ के आसपास के वन क्षेत्रों में व्यापक रैपिड मल्टी-टैक्सन वन्यजीव सर्वेक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया।
यह सर्वेक्षण लेक बीट, पटियाला की राव, सुखना चोए वन क्षेत्र, बॉटनिकल गार्डन, बटरफ्लाई पार्क तथा सिटी बर्ड सैंक्चुअरी सहित महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्रों में किया गया। इस अभियान में वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं, स्वयंसेवकों, गैर-सरकारी संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मैदानी सर्वेक्षण से पूर्व 18 एवं 19 नवंबर 2025 को “वन्यजीव सर्वेक्षण एवं तकनीक” विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य विभागीय अधिकारियों एवं प्रतिभागियों को वैज्ञानिक सर्वेक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण देना था।
सर्वेक्षण के दौरान जैव विविधता के आकलन हेतु लाइन ट्रांसेक्ट, साइन सर्वे, कैमरा ट्रैपिंग, प्वाइंट काउंट सर्वे एवं ऑडिमेट्रिक सैंपलिंग जैसी वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया गया।
वनस्पति सर्वेक्षण के अंतर्गत अभयारण्य के 12 स्थानों पर 50 नेस्टेड क्वाड्रेट प्लॉट लगाए गए, जिनमें कुल 79 पौधों की प्रजातियाँ दर्ज की गईं। इनमें 43 वृक्ष प्रजातियाँ, 14 झाड़ी प्रजातियाँ तथा 22 शाकीय प्रजातियाँ शामिल हैं। यूकेलिप्टस सबसे प्रमुख वृक्ष प्रजाति के रूप में सामने आई, जबकि जस्टिसिया अधाटोडा को सर्वाधिक घनी झाड़ी प्रजाति पाया गया, जो मिट्टी एवं नमी संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हर्पेटोफौना सर्वेक्षण में मेंढकों, कछुओं, सांपों एवं छिपकलियों सहित कुल 13 प्रजातियाँ दर्ज की गईं। इनमें से पांच प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-I तथा एक प्रजाति अनुसूची-II के अंतर्गत आती है।
बटरफ्लाई सर्वेक्षण में पांच परिवारों की कुल 73 तितली प्रजातियाँ दर्ज की गईं। इनमें निम्फालिडी परिवार प्रमुख रहा, जबकि येलो ऑरेंज टिप सबसे अधिक संख्या में पाई गई प्रजाति रही। सर्वेक्षण में पी ब्लू, कॉमन ओनिक्स तथा इंडिगो फ्लैश जैसी अनुसूची-II तितली प्रजातियाँ भी दर्ज की गईं।
पक्षी सर्वेक्षण में कुल 132 पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जिनमें 13 प्रजातियाँ अनुसूची-I तथा 117 प्रजातियाँ अनुसूची-II के अंतर्गत आती हैं। आईयूसीएन संरक्षण स्थिति के अनुसार सर्वेक्षण में दो संकटग्रस्त, एक असुरक्षित तथा तीन निकट संकटग्रस्त प्रजातियाँ भी दर्ज की गईं। ह्यूम्स वार्बलर इस क्षेत्र में सर्वाधिक संख्या में पाया जाने वाला पक्षी रहा।
स्तनधारी सर्वेक्षण में 13 ट्रेल्स पर प्रत्यक्ष अवलोकन तथा पगमार्क, मल, खुरों के निशान एवं अन्य अप्रत्यक्ष संकेतों के आधार पर कुल 16 प्रजातियाँ दर्ज की गईं। सांभर, नीलगाय एवं जंगली सूअर प्रमुख स्तनधारी प्रजातियों के रूप में सामने आए। अभयारण्य में सांभर की घनत्व दर 22.34 ± 8.07 प्रति वर्ग किलोमीटर आंकी गई।
18 कैमरा ट्रैप स्टेशनों के माध्यम से 125 ट्रैप नाइट्स के दौरान कुल 466 स्वतंत्र वन्यजीव रिकॉर्डिंग दर्ज की गईं। विशेष रूप से, सर्वेक्षण में दो वयस्क नर तेंदुओं की उपस्थिति की पुष्टि हुई, जिनकी पहचान उनके विशिष्ट रोसेट पैटर्न के आधार पर की गई। अध्ययन में तेंदुओं एवं भारतीय साही की मुख्यतः रात्रिकालीन गतिविधियाँ भी सामने आईं।
वर्ष 2021 में किए गए पिछले सर्वेक्षण की तुलना में इस बार जैव विविधता के आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। स्तनधारी प्रजातियों की संख्या 14 से बढ़कर 16 तथा पक्षी प्रजातियों की संख्या 67 से बढ़कर 132 हो गई। साथ ही पहली बार बटरफ्लाई एवं हर्पेटोफौना सर्वेक्षण को शामिल किया गया, जिससे अध्ययन और अधिक व्यापक बन गया।
इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष चंडीगढ़ के वन क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, आवास प्रबंधन, पारिस्थितिक निगरानी एवं वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
वन एवं वन्यजीव विभाग ने इस सर्वेक्षण को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में भारतीय वन्यजीव संस्थान, फील्ड स्टाफ, स्वयंसेवकों, गैर-सरकारी संगठनों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।



