चंडीगढ़ में प्रस्तावित बल्क मार्केट प्रोजेक्ट को लेकर उठे पर्यावरणीय विवाद ने महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होकर मामले में ट्रिब्यूनल की सहायता करने का निर्देश दिया है ।
यह निर्देश ओरिजिनल एप्लीकेशन नंबर 158/2026 (आईए 165/2026), डॉ. राजिंदर के. सिंगला बनाम यूटी चंडीगढ़ एवं अन्य में जारी किया गया। मामले की सुनवाई 20 मई 2026 को माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, चेयरपर्सन तथा विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की।
20 मई के आदेश में ट्रिब्यूनल ने दर्ज किया कि आवेदक की ओर से बताया गया कि रिस्पॉन्डेंट नंबर 1 ने नोटिस स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। चूंकि वह मामले में एक कंटेस्टिंग पार्टी है, इसलिए ट्रिब्यूनल ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव को अगली तारीख पर वर्चुअल रूप से उपस्थित होकर मामले में ट्रिब्यूनल की सहायता करने का निर्देश दिया।
मामला लगभग 44 एकड़ में प्रस्तावित बल्क मार्केट प्रोजेक्ट में कथित पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन से जुड़ा है। इस परियोजना में 191 एक-कनाल के व्यावसायिक प्लॉट और 48 बूथ साइट्स प्रस्तावित हैं।
व्हिसलब्लोअर एवं आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. राजिंदर के. सिंगला द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह परियोजना ईआईए नोटिफिकेशन, 2006 के Item 8(ए)/8(बी) के अंतर्गत आती है और इसके लिए पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति (एनवायरनमेंटल क्लियरेंस) आवश्यक है । आवेदक के अनुसार परियोजना के लिए आवश्यक एनवायरनमेंटल क्लियरेंस (ईसी), कॉन्सेंट टू एस्टेब्लिश (सीटीई) तथा कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) प्राप्त नहीं किए गए।
मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक लगभग 332 पेड़ों की कथित कटाई से संबंधित है। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि परियोजना से संबंधित गतिविधियां शुरू करने से पहले विधिवत एनवायरनमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट (ईआईंए), पब्लिक कंसल्टेशन तथा वैधानिक पर्यावरणीय मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
डॉ. सिंगला ने एनजीटी से कथित उल्लंघनों की व्यापक जांच, समग्र पर्यावरणीय मूल्यांकन, क्षतिग्रस्त पर्यावरण की बहाली तथा पॉल्यूटर पेयज प्रिंसिपल के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने सहित आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रिकॉशनरी प्रिंसिपल, सस्टेनेबल डेवलपमेंट तथा पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन के अनुपालन की भी मांग की है।
एनजीटी ने 20 मई 2026 के अपने आदेश में आवेदक को फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को उसके सेक्रेटरी के माध्यम से पक्षकार बनाने की भी अनुमति दी। ट्रिब्यूनल ने यह भी आदेश में दर्ज किया कि रिस्पॉन्डेंट नंबर 2 और 4 की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने बताया कि रिस्पॉन्डेंट नंबर 4 का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और एनवायरनमेंटल क्लियरेंस देने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज (MoEF&CC) है जिनको नोटिस की तामील के बावजूद उसकी ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ था। ट्रिब्यूनल ने आवेदक को आदेश की प्रति MoEF&CC को भेजने का निर्देश दिया।
डॉ. सिंगला ने पर्यावरणीय मंजूरियों, पेड़ों की कटाई तथा परियोजना से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए इससे पहले 9 सितंबर 2025 को RTI आवेदन दायर किया था। उनका आरोप है कि निर्धारित वैधानिक अवधि के भीतर मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय हरित अधिकरण का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अब ट्रिब्यूनल ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है। चंडीगढ़ में एक बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट में कथित पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें अनिवार्य पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों तथा वैधानिक स्वीकृतियों के पालन से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
डॉ. सिंगला के अनुसार, एनजीटी का रुख करने का उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्य पर्यावरणीय कानूनों के अनुरूप हों तथा वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के पर्यावरणीय अधिकारों से कोई समझौता न किया जाए ।


