यह दुनिया में सबसे बेहतरीन काम है जो कोई भी कर सकता है।”
स्थापना दिवस समारोह का आयोजन “बियॉन्ड कनेक्टिविटी: सिक्योर, ट्रस्टेड एंड इंटेलिजेंट कम्यूनिकेशन” विषय पर आधारित एक दिवसीय सम्मेलन के तहत किया गया। इसमें उभरती प्रौद्योगिकियों और बदलते संचार परिदृश्य पर विचार-विमर्श करने के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और शिक्षाविद एक साथ मंच पर आए।
इस तकनीकी सम्मेलन में दूरसंचार के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीन क्षेत्रों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए: साइबर सुरक्षा, 6जी संचार और क्वांटम सुरक्षित संचार। साइबर सुरक्षा सत्रों में आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रोफेसर मनोज सिंह गौर और माइक्रोसॉफ्ट के भारत एवं दक्षिण एशिया के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी श्री मंदार कुलकर्णी शामिल हुए। 6जी सत्रों में आईआईएससी बेंगलुरु के प्रोफेसर चंद्र आर. मूर्ति, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर आर. डेविड कोइलपिल्लई और टीएसडीएसआई के महानिदेशक श्री ए.के. मित्तल ने भाग लिया। वहीं क्वांटम सुरक्षित संचार सत्रों में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की विशेषज्ञ समिति की सदस्य प्रोफेसर रूपमंजरी घोष, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी, यूएसए के ईसीई व एप्लाइड फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर तथा ईसीई विभाग के अंतरिम अध्यक्ष प्रोफेसर प्रेम कुमार और एनसीआईआईपीसी के उप महानिदेशक श्री आशीष कुमार मिश्रा ने अपने विचार रखे। इन सत्रों का समापन सी-डॉट के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार दलेला द्वारा साइबर सुरक्षा खंड और सी-डॉट के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. दिलीप कृष्णस्वामी द्वारा क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन सेगमेंट के मुख्य निष्कर्षों एवं महत्वपूर्ण विचारों को साझा करने के साथ हुआ।
इस अवसर पर बोलते हुए, सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा, “पिछले 42 वर्षों में सी-डॉट की यात्रा राष्ट्र के लिए स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता से संचालित रही है। जैसे-जैसे दूरसंचार पारंपरिक कनेक्टिविटी से आगे बढ़ रहा है, हमारा ध्यान सुरक्षित, विश्वसनीय और इंटेलिजेंट कम्युनिकेशन सिस्टम की ओर केंद्रित हो रहा है। साइबर सुरक्षा, क्वांटम-सुरक्षित संचार, 6जी और अन्य उभरते क्षेत्रों में अपने काम के माध्यम से, सी-डॉट भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
वर्षों से, सी-डॉट ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर में बदलाव लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने ग्रामीण कनेक्टिविटी, भारतनेट, 4जी और 5जी प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अगली पीढ़ी के नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेटवर्क प्रबंधन प्रणालियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया है। इसके अलावा, सी-डॉट 6जी और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी खोजपूर्ण अनुसंधान कर रहा है, जो भारत को एक वैश्विक प्रौद्योगिकी अग्रज बनाने के दृष्टिकोण में अपना योगदान दे रहा है।
43वें स्थापना दिवस का यह समारोह स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने तथा एक सुरक्षित, विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल संचार इकोसिस्टम के विकास में योगदान देने की सी-डॉट की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। अपने 43वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, सी-डॉट ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण और भारत को अगली पीढ़ी की विश्वसनीय कनेक्टिविटी में एक ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने की आकांक्षा के अनुरूप 6जी, क्वांटम-सुरक्षित संचार और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में अपने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को जारी रखे हुए है।


