हरियाणा के राज्यपाल एवं पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष ने युवा चिकित्सकों से करुणा, नैतिकता और सेवा-भाव को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोच्च दायित्व है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर समाज में आशा, विश्वास और जीवन के प्रतीक होते हैं, इसलिए उन्हें संवेदनशीलता, विनम्रता और समर्पण भाव के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
राज्यपाल आज रोहतक में आयोजित पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 5वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष भी उपस्थित रहीं। दीक्षांत समारोह में कुल 950 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गई, जबकि 68 मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने स्मारिका का विमोचन भी किया।
नवस्नातक विद्यार्थियों एवं उनके परिजनों को बधाई देते हुए प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व, सेवा और समर्पण से परिपूर्ण जीवन की नई शुरुआत है। राज्यपाल ने हरियाणा के प्रथम मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित भगवत दयाल शर्मा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनके आदर्शों से प्रेरित यह विश्वविद्यालय सेवा परमो धर्म: की भावना को सार्थक रूप से आगे बढ़ा रहा है।
राज्यपाल ने शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा अर्जित उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित टेली-परामर्श सेवाओं तथा स्वास्थ्य आपके द्वार जैसी जनहितकारी पहलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन प्रयासों ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुदृढ़ करने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य जागरूकता को भी नई दिशा दी है।
प्रो. असीम कुमार घोष ने कुलपति के नेतृत्व में एस. ओ. टी. टी. ओ. हरियाणा माध्यम से चलाए जा रहे अंगदान जागरूकता अभियान की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल ने अनेक परिवारों में नई आशा जगाई है और यह वास्तव में इस भावना को परिलक्षित करती है कि जीवन के दान से बड़ा कोई दान नहीं है। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि मन की बात के माध्यम से की गई अपील ने पूरे देश में अंगदान आंदोलन के प्रति जन-जागरूकता और जन-भागीदारी को काफी मजबूत किया है।
प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने यह अनुभव किया होगा कि मरीज डॉक्टरों पर कितना गहरा विश्वास करते हैं और रोगियों को राहत प्रदान करने तथा जीवन बचाने से कितनी आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान को करुणा, कौशल को नैतिकता और निर्णयों को सेवा-भाव से संचालित करें। राज्यपाल ने कहा कि देश को आज भी विशेष रूप से ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में समर्पित चिकित्सकों की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक विद्यार्थी समाज सेवा के लिए आगे आएंगे, जबकि कुछ चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


