सबसे ऊपर रखते हैं। श्री मोदी ने कहा, “आप सभी ने जिस तरह से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को अपनाया है, वह और भी कई युवाओं को प्रेरित करेगा।”
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की 21 वर्षीय माईभारत स्वयंसेवक सुश्री सायंतिका मिस्त्री ने प्रधानमंत्री को माईभारत जैसा प्लेटफॉर्म बनाने के लिए धन्यवाद दिया, जिससे करोड़ों युवा देश के निर्माण में योगदान दे सकें। समुद्र तल से लद्दाख के ‘मान’ गांव (जो लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर है) तक की अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए, उन्होंने ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ (ऊंचाई पर होने वाली बीमारी) से जूझने और माईभारत टीम व आईटीबीपी के जवानों से मिली देखभाल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने अपने जवानों का इलाज करने से पहले उन्हें एक मेहमान मानकर उनका इलाज करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि इस अनुभव से पता चला कि आईटीबीबी के जवान न केवल सीमाओं की रक्षा करते हैं, बल्कि नागरिकों का भी बहुत ख्याल रखते हैं। साथ ही, उन्हें ऊंचाई वाले इलाकों में रहने के लिए जरूरी हिम्मत और सहनशक्ति का भी एहसास हुआ। उनके परिवार को लग रहा था कि वहां कनेक्टिविटी खराब होगी, लेकिन इसके उलट उन्हें सीमावर्ती इलाके में भरोसेमंद इंटरनेट, क्यूआर-कोड, यूपीआई पेमेंट की सुविधाएं और वाई-फाई मिला। उन्होंने स्थानीय बच्चों से भी बातचीत की, जिनमें से एक ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह घूमने की इच्छा जताई। उन्होंने वहां के लोगों की आपसी एकता और सहयोग की भावना का भी उल्लेख किया, जिसके जरिए वे मिलकर शादियां और मठ के कार्यक्रम आयोजित करते हैं, खराब हुए मोबाइल टावर को ठीक करते हैं और उसकी बैटरी के लिए स्टोरेज की जगह बनाते हैं।
श्री मोदी ने सुश्री मिस्त्री को अपने अनुभव को लेखों या किताब के ज़रिए दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि दूसरे लोग देश की विशालता, यहां के लोगों और आपसी जुड़ाव की भावना को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने कहा, “जब आप खुशियां बांटते हैं, तो वे बढ़ती हैं।”
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के माईभारत स्वयंसेवक श्री आशीष सोनी, जो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, ने बजट बनाने की प्रक्रिया के दौरान युवाओं को सुझाव देने का मौका देने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। हिमाचल प्रदेश के स्पीति इलाके के काजा खास का अपना अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता, जिन्हें याद था कि दूर-दराज के इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी कितनी मुश्किल होती थी, यह देखकर हैरान रह गए जब उन्होंने लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई से उन्हें वीडियो-कॉल किया। माईभारत को संघर्ष देखने वाली पीढ़ी और बदलाव देखने वाली पीढ़ी के बीच एक पुल बताते हुए, उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस हिक्किम से प्रधानमंत्री, अपने परिवार, युवा मामलों के मंत्रालय, रक्षा मंत्री और अपने ज़िलाधिकारी को पत्र लिखने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल मेट्रो और एयरपोर्ट से जुड़ा है, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में सेवा देने वाले संस्थानों से भी जुड़ा है। उन्होंने लगभग 14,500 फीट की ऊंचाई पर क्यूआर-कोड पेमेंट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि डिजिटल इंडिया पूरे देश में भरोसे का जरिया बन गया है। महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों के साथ बातचीत से उन्हें होमस्टे, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सी-बकथॉर्न आधारित उत्पादों के जरिए उद्यमिता के बारे में पता चला, जबकि पीएम मुद्रा योजना और दीनदयाल अंत्योदय योजना पर चर्चा में आजीविका के मौकों को बढ़ाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में सीमा सड़क संगठन (बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन) द्वारा बनाए गए चिचम पुल की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और साथ ही इस इलाके में नाइट टूरिज्म की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
यह देखते हुए कि तकनीक देश के हर कोने तक पहुंच गई है और स्थानीय उत्पाद खरीदने से रोजगार पैदा होगा, आजीविका को सहारा मिलेगा और क्षेत्रीय पहचान पूरे भारत में फैलेगी, श्री मोदी ने आग्रह किया, “आप जहां भी जाएं, अपने यात्रा बजट का कम से कम पांच प्रतिशत स्थानीय लोगों से उत्पाद खरीदने में खर्च करें।”
संवाद के अंत में, प्रधानमंत्री ने युवा प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम में ‘माईभारत’ की भूमिका पर जोर दिया गया, जिसने युवाओं को भारत के सीमावर्ती गांवों में आए बदलावों को खुद अनुभव करने, पुरानी सोच को बदलने और देश की सांस्कृतिक विविधता, विकास की प्रगति, सामुदायिक भागीदारी और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के बारे में अपनी समझ को गहरा करने में मदद की।


