सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में जागरूक समाज और जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक जागरूक समाज जहां सशक्त लोकतंत्र की नींव रखता है, वहीं जनप्रतिनिधि समाज की अपेक्षाओं को नीतियों और जनकल्याणकारी निर्णयों का स्वरूप प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा उत्तरदायी बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में देशभर के विधानमंडलों को एक साझा संसदीय मंच पर जोड़ने, डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने तथा सर्वोत्तम संसदीय परंपराओं के आदान-प्रदान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
श्री हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि हरियाणा विधानसभा विधायी सुदृढ़ीकरण, क्षमता निर्माण और संवैधानिक जागरूकता की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। लोकसभा सचिवालय के सहयोग से विधायकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, समिति अध्यक्षों तथा मीडिया प्रतिनिधियों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। साथ ही युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जोड़ने के लिए यूथ पार्लियामेंट और युवा सम्मेलनों का आयोजन भी किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण तथा युवा मामलों से संबंधित विषय समितियों का गठन भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विधानसभा को और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
श्री हरविन्द्र कल्याण ने सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारियों, उपाध्यक्षों, विधायकों तथा संसदीय अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली को समाहित करने वाला यह क्षेत्रीय मंच लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने, संसदीय अनुभवों के आदान-प्रदान तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन के दौरान होने वाले विभिन्न सत्र और विचार-विमर्श प्रतिभागियों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में नए सुझाव और अनुभव प्राप्त होंगे।


