चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों पर विचार करने के लिए चंडीगढ़ हेरिटेज कमेटी की बैठक श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, यू.टी. चंडीगढ़-सह-अध्यक्ष, चंडीगढ़ हेरिटेज कमेटी की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
श्री दिप्रवा लाकड़ा, आईएएस, वित्त सचिव-सह-सचिव, नगर नियोजन, यू.टी. चंडीगढ़ ने प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि चंडीगढ़ की विशिष्ट वास्तुकला एवं विरासत पहचान को सुरक्षित रखते हुए नागरिकों की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शहर की नियोजन व्यवस्था को संतुलित एवं जिम्मेदार तरीके से विकसित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियोजन प्रावधानों को तर्कसंगत एवं सरल बनाए जाने से प्रक्रियात्मक कठिनाइयां कम होंगी, अधिक स्पष्टता आएगी तथा वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप संपत्तियों का उचित उपयोग एवं विकास सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य निवासियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों और अन्य व्यावसायिक हितधारकों को अधिक सुविधा प्रदान करना है। ये उपाय अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और उत्तरदायी नियोजन प्रावधानों के माध्यम से विशेष रूप से चंडीगढ़ के फेज-II और फेज-III में नागरिकों एवं प्रतिष्ठानों की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। इन सुधारों से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास और आधुनिकीकरण में सहायता मिलेगी तथा शहर में जीवन और कारोबार करने की सुगमता में सुधार होगा।
मुख्य सचिव ने जोर देते हुए कहा कि विकास और विरासत संरक्षण एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। व्यापक जन परामर्श, स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की गई जांच और बैठक में हुए विस्तृत विचार-विमर्श के मद्देनजर उन्होंने कमेटी के सदस्यों से प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी देने का आग्रह किया, ताकि इन्हें सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के लिए प्रशासक, यू.टी. चंडीगढ़ के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने कहा कि ये संशोधन चंडीगढ़ के ऐतिहासिक नियोजन सिद्धांतों एवं विशिष्ट शहरी स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए योजनाबद्ध और संतुलित विकास को संभव बनाएंगे।
श्री दिप्रवा लाकड़ा ने कमेटी को बताया कि शहर के फेज-I, जिसमें सेक्टर 1 से 30 शामिल हैं, में किसी बदलाव का प्रस्ताव नहीं किया गया है। फेज-II में केवल नवनिर्मित किए जाने वाले सरकारी फ्लैटों के लिए ही स्टिल्ट पार्किंग की अनुमति दी जाएगी, जिससे शहर के विरासत स्वरूप और नियोजन संतुलन को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
उन्होंने कमेटी के सदस्यों को चंडीगढ़ के फेज-III के लिए प्रस्तावित संशोधनों और योजनाबद्ध विकास पर उनके संभावित प्रभावों से भी अवगत कराया। यह भी बताया गया कि बढ़े हुए फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर)/कवर्ड एरिया का लाभ वास्तुशिल्प नियंत्रण के अधीन औद्योगिक भवनों के साथ-साथ जोनिंग मानकों के अंतर्गत आने वाले औद्योगिक भवनों को भी दिया जाएगा। औद्योगिक भवनों के लिए प्लॉट के आकार की परवाह किए बिना एफएआर को बढ़ाकर 2 करने का प्रस्ताव है।
प्रस्तुति में मौजूदा प्रावधानों, हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों तथा शहर की बदलती शहरी आवश्यकताओं को पूरा करने की जरूरत को भी शामिल किया गया।
प्रस्तुति के बाद कमेटी के सदस्यों, प्रशासनिक सचिवों और बैठक में उपस्थित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों से टिप्पणियां एवं सुझाव आमंत्रित किए गए। प्रस्तावों पर चंडीगढ़ के विरासत स्वरूप, वर्तमान विकास संबंधी आवश्यकताओं, कारोबार करने की सुगमता, जनसुविधा तथा योजनाबद्ध शहरी विकास के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में श्री मंदीप सिंह बराड़, गृह सचिव; सुश्री प्रेरणा पुरी, सचिव, इंजीनियरिंग; श्री अमित कुमार, आयुक्त, नगर निगम चंडीगढ़; श्री निशांत कुमार यादव, उपायुक्त; श्री डी. कार्तिकेयन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड; श्री राजीव मेहता, मुख्य वास्तुकार; श्री सी.बी. ओझा, मुख्य अभियंता; एडवोकेट श्री एम.एल. सरीन; श्री रजनीश वट्टास तथा पूर्व मुख्य वास्तुकार श्री कपिल सेतिया भी उपस्थित थे।


