17वीं पेंशन अदालत के दौरान, 16वीं पेंशन अदालत की सफलता पर आधारित पर्चे और पारिवारिक पेंशनभोगियों की जीवन सुगमता नामक ई-पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इन प्रकाशनों में पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के प्रभावी शिकायत निवारण और उनके बेहतर अनुभव के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का उल्लेख किया गया है।
17वीं पेंशन अदालत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा पेंशनभोगियों की शिकायतों के सार्थक, सुलभ और त्वरित निवारण के लिए विकसित संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा है।
इसमें श्रीमती चंदर कांता जल्ली का मामला एक अनुकरणीय उदाहरण रहा, जिनके पति ने 1973 में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्हें उदारीकृत पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी। हालांकि, कुछ कारणों से, उन्हें मिलने वाली पारिवारिक पेंशन उनकी हकदार राशि से कम थी। जब उन्हें इस बात का पता चला तब उन्होंने विभिन्न मंचों से संपर्क किया। पेंशन अदालत के दौरान, उनके पुत्र श्री जसविंदर जल्ली ने चंडीगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा भाग लिया और माननीय लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री के समक्ष अपनी माता की ओर से शिकायत प्रस्तुत की। मामले पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद, पारिवारिक पेंशन के रूप में 2.02 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी की गई।
एक अन्य मामले में, पेंशन अदालत की मदद से सुश्री दमयंती सिन्हा को 72 लाख रुपये से अधिक की पेंशन राशि जारी की गई।


