केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज आंध्र प्रदेश में 10 क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) और 12 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं (आईपीएचएल) का उद्घाटन किया। इस मौके पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और आंध्र प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सत्य कुमार यादव के साथ-साथ सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं के पेशेवर भी मौजूद थे।
आज जिन 10 क्रिटिकल केयर ब्लॉक का उद्घाटन किया गया, वे जीएमसी कडप्पा, एसीएसआर जीएमसी नेल्लोर, जीएमसी श्रीकाकुलम, एएमसी विशाखापत्तनम, जीएमसी ओंगोल, जिला अस्पताल अनाकापल्ली, जीएमसी राजमहेंद्रवरम, केएमसी कुरनूल, जिला अस्पताल हिंदूपुर और एसएमसी विजयवाड़ा में स्थित हैं। वहीं, 12 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य लैबोरेटरी एरिया अस्पताल सीतामपेटा, एरिया अस्पताल गुंटाकल, एरिया अस्पताल पलमनेर, एरिया अस्पताल अगनम्पूडी, एरिया अस्पताल नंदीगामा, एरिया अस्पताल चिराला, एरिया अस्पताल अराकू, एरिया अस्पताल नरसाराओपेट, एरिया अस्पताल बनगनपल्ली, एरिया अस्पताल अनापर्थी, एरिया अस्पताल टुनी और एरिया अस्पताल गुडूर में स्थित हैं। श्री नड्डा ने कहा कि ये सुविधाएं आंध्र प्रदेश और पूरे देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों और स्वास्थ्य-सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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सभा को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि यह उद्घाटन “सिर्फ ढ़ांचागत सुविधाओं का उद्घाटन नहीं है, बल्कि आंध्र प्रदेश और देश के लिए एक मज़बूत स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।” उन्होंने कहा कि क्रिटिकल केयर ब्लॉक और इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी एक मज़बूत स्वास्थ्य व्यवस्था के दो ज़रूरी पहलू हैं: “गंभीर रूप से बीमार मरीज़ की जान बचाने की क्षमता और बीमारियों के खतरों का पता लगाने और उनके बड़े पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बनने से पहले ही उनसे निपटने की क्षमता।”
कोविड-19 महामारी से मिले सबक को याद करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस संकट ने दिखाया कि कैसे एक स्वास्थ्य इमरजेंसी तेज़ी से आर्थिक, सामाजिक, आजीविका और आखिरकार राष्ट्रीय इमरजेंसी में बदल सकती है। श्री नड्डा ने कहा, “कोविड-19 ने हमें सिखाया कि स्वास्थ्य सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है।” उस महामारी ने इस बात की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया कि हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए, जो रोज़मर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट डाले बिना किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना कर सके।
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श्री नड्डा ने कहा कि महामारी के दौरान, आम अस्पतालों के मूलभूत ढ़ांचे को आइसोलेशन और कोविड-केयर सुविधाओं में बदलना पड़ा, जिससे कोविड के अलावा दूसरी ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) शुरू किया गया। इसका मकसद भविष्य की महामारियों और सार्वजनिक स्वास्थय इमरजेंसी से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता को मज़बूत करना है, साथ ही आम स्वास्थ्य सेवाओं को भी जारी रखना है।
श्री नड्डा ने कहा, “अब हम अस्पतालों को सिर्फ बिस्तरों की संख्या के आधार पर नहीं देख सकते।” उन्होंने आगे कहा, “एक मज़बूत स्वास्थ्य प्रणाली में क्रिटिकल-केयर क्षमता, ऑक्सीजन और मेडिकल-गैस सिस्टम, आइसोलेशन की सुविधाएँ, ट्रेंड स्टाफ, लैब की क्षमता और बीमारियों के फैलने का जल्द पता लगाने की क्षमता होनी चाहिए, साथ ही आम स्वास्थ्य सेवाएँ भी जारी रहनी चाहिए।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम-एबीएचआईएम भारत के पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के नज़रिए में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा, “इसका मकसद सिर्फ और सुविधाएँ बनाना नहीं है। इसका मकसद एक ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है, जो मुस्तैद हो, आपस में जुड़ी हो, मज़बूत हो और भविष्य की हेल्थ इमरजेंसी से निपटने में सक्षम हो।”
पीएम-एबीएचआईएम के तहत, भारत सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 631 क्रिटिकल केयर ब्लॉक को मंज़ूरी दी है, जिससे क्रिटिकल केयर क्षमता का एक देशव्यापी नेटवर्क तैयार हो रहा है। आंध्र प्रदेश के लिए, भारत सरकार ने पाँच साल की योजना अवधि के दौरान चार मुख्य घटकों- क्रिटिकल केयर ब्लॉक, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थय प्रयोगशालाएं, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर और ग्रामीण आयुष्मान आरोग्य मंदिर, के लिए ₹1,271.80 करोड़ की मंज़ूरी दी है। श्री नड्डा ने कहा कि यह समुदाय स्तर से लेकर ज़िला और टर्शियरी-केयर सुविधाओं तक स्वास्थ्य सेवा को मज़बूत करने के सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
पीएम-एबीएचआईएम के तहत, आंध्र प्रदेश में लगभग ₹606 करोड़ के अनुमानित निवेश से 24 क्रिटिकल केयर ब्लॉक को मंज़ूरी दी गई है। इनकी योजना सरकारी मेडिकल कॉलेजों, ज़िला अस्पतालों और एरिया अस्पतालों में बनाई गई है। बेहतर इलाज तक समय पर पहुँच के महत्व पर ज़ोर देते हुए, श्री नड्डा ने कहा, “क्रिटिकल केयर समुदाय के नज़दीक उपलब्ध होनी चाहिए।”
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श्री नड्डा ने कहा कि जहाँ सीसीबी गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों की देखभाल करने की स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता को मज़बूत करते हैं, वहीं इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरीज़ (आईपीएचएल) बीमारी को समझने, उसका पता लगाने और उसे नियंत्रित करने की क्षमता को मज़बूत करती हैं। पीएम-एबीएचआईएम के तहत, आंध्र प्रदेश के लिए ₹32.50 करोड़ के आवंटन के साथ 26 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरीज़ को मंज़ूरी दी गई है। सभी 26 आईपीएचएल का सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, 14 पहले से ही चालू हैं और बाकी 12 उद्घाटन के लिए तैयार हैं।
श्री नड्डा ने कहा, “कोविड-19 से मिला सबक बहुत स्पष्ट था: अगर हम किसी स्वास्थ्य आपात स्थिति का जल्दी पता नहीं लगा सकते, तो हम उससे प्रभावी ढंग से नहीं लड़ सकते।” उन्होंने प्रयोगशाला क्षमता को केवल नैदानिक सेवा से कहीं अधिक बताते हुए इसे “राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा का एक घटक” कहा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम-एबीएचआईएम के तहत सरकार का विज़न टर्शियरी अस्पतालों से आगे बढ़कर स्वास्थ्य सेवा के सभी स्तरों को शामिल करता है। ज़मीनी स्तर पर, आयुष्मान आरोग्य मंदिर समुदायों के करीब व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाते हैं। मज़बूत किए गए पीएचसी और सीएचसी रेफरल और सेकेंडरी देखभाल प्रदान करते हैं, जबकि क्रिटिकल केयर ब्लॉक ज़िला स्तर पर एडवांस्ड इमरजेंसी और इंटेंसिव केयर प्रदान करते हैं और आईपीएचएल डायग्नोस्टिक और निगरानी क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, “ये सभी घटक मिलकर देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों की एक निरंतरता बनाते हैं।” उन्होंने इसे भारत की स्वास्थ्य नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया: “हम अस्पताल-केंद्रित दृष्टिकोण से स्वास्थ्य-प्रणाली-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहे हैं।”
श्री नड्डा ने कहा कि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आए बदलाव को ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017’ के नज़रिए से देखा जाना चाहिए। इस नीति ने स्वास्थ्यसेवा के लिए बचाव, बढ़ावा देने और व्यापक नज़रिए की ओर एक अहम बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले, ज़्यादातर ध्यान बचाव वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर था, जबकि उसके बाद बचाव, प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थकेयर के बीच मज़बूत तालमेल बनाने पर ज़ोर दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने बचाव, सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थकेयर के बीच मज़बूत तालमेल बनाने की कोशिश की है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं व्यापक और लोगों पर केंद्रित हो सके।” उन्होंने आगे कहा कि इस नज़रिए से एक ज़्यादा एकीकृत स्वास्थय सेवा व्यवस्था एकीकृत बनी है, जिसमें प्राइमरी और सेकेंडरी हेल्थकेयर को मज़बूत करने के साथ-साथ टर्शियरी हेल्थकेयर संस्थानों का भी विस्तार हुआ है।
श्री नड्डा ने बताया कि देश भर में 1.75 लाख से ज़्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं, जिससे व्यापक प्राइमरी स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के घरों तक पहुँच गई है। ये केंद्र कई तरह की सेवाएँ देते हैं, जैसे कि डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन की स्क्रीनिंग, प्रसव-पूर्व जाँच, टीकाकरण और बचाव व स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली अन्य सेवाएँ। उन्होंने बताया कि 42 करोड़ से ज़्यादा लोगों की डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के लिए, 36 करोड़ से ज़्यादा लोगों की मुँह के कैंसर के लिए, 17 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर के लिए और 9 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग की गई है। उन्होंने बचाव वाली हेल्थकेयर को मज़बूत करने और आने वाली पीढ़ियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने की दिशा में एचपीवी वैक्सीन की शुरुआत को भी एक अहम कदम बताया।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने डिजिटल तकनीक के ज़रिए भारत के टीकाकरण कार्यक्रम को मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि जन्म से लेकर 16 साल की उम्र तक 12 टीके लगाए जाते हैं और टीकाकरण का रिकॉर्ड यू-विन के ज़रिए डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाता है। यह मंच टीकाकरण का डिजिटल रिकॉर्ड रखने में मदद करता है और यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर ज़रूरी टीके मिलें। श्री नड्डा ने टीकाकरण में शानदार प्रदर्शन के लिए आंध्र प्रदेश की तारीफ की और कहा कि राज्य ने मिशन इंद्रधनुष के तहत बहुत अच्छा काम किया है, जो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।
भारत के स्वास्थ्य-तंत्र में आए बड़े बदलावों का ज़िक्र करते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि 2023-24 में संस्थागत प्रसव यानी अस्पताल में होने वाली डिलीवरी का आंकड़ा 90 प्रतिशत से ज़्यादा हो गया है। उन्होंने बताया कि भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 48 प्रतिशत रही है। वहीं, पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 61 प्रतिशत थी। नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 54 प्रतिशत थी। उन्होंने आगे बताया कि डब्ल्यूएचओ की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टीबी के मामलों में 25 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 12 प्रतिशत थी। इसके साथ ही, टीबी के इलाज का कवरेज 90 प्रतिशत से ज़्यादा हो गया है। श्री नड्डा ने कहा कि अपनी जेब से होने वाले खर्च का घटकर 43.4 प्रतिशत हो जाना भी नागरिकों को मिल रही बढ़ती वित्तीय सुरक्षा का एक अहम संकेत है। उन्होंने कहा कि देश के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी विस्तार हुआ है। सिर्फ 12 सालों में 16 नए एम्स बनाए गए हैं, जिससे देश में एम्स की कुल संख्या 23 हो गई है।
श्री नड्डा ने आंध्र प्रदेश के संजीवनी कार्यक्रम की भी तारीफ की, जो लोगों के घर-घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचा रहा है और 41 स्वास्थ्य मानकों की टेस्टिंग की सुविधा दे रहा है। उन्होंने समुदायों के नज़दीक स्क्रीनिंग और हेल्थकेयर सेवाएँ पहुँचाने के राज्य के नए और अनोखे तरीक़े की सराहना की और कहा कि ऐसी पहल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने के लिए बेहतरीन मॉडल पेश करती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर संजीवनी मॉडल को लागू करने की संभावनाओं को परखने में दिलचस्पी दिखाई।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीएम-एबीएचआईएम परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आंध्र प्रदेश सरकार के नेतृत्व और उसके स्वास्थ्य विभाग, अधिकारियों तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पेशेवरों की कोशिशों की तारीफ़ की। उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ़, लैब टेक्नीशियनों, इमरजेंसी-केयर टीमों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स का भी आभार जताया। श्री नड्डा ने कहा, “इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता बना सकता है। तकनीक संपर्क बनाने में मददगार हो सकती है। प्रयोगशालाएं नैदानिक क्षमता बना सकती हैं। लेकिन आख़िरकार, लोग ही लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाते हैं।” कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दिखाए गए साहस को याद करते हुए, उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से नई सुविधाओं का इस्तेमाल करके “योग्यता, संवेदना और सम्मान” के साथ देखभाल करने का आग्रह किया।
श्री नड्डा ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव लाने में आंध्र प्रदेश की अहम भूमिका है और राज्य से मिलने वाले अनुभव और बेहतरीन तौर-तरीके सार्वजनिक स्वास्थ्य को मज़बूत करने की बड़ी राष्ट्रीय कोशिश में योगदान दे सकते हैं।
पृष्ठभूमि:
भारत सरकार ने आंध्र प्रदेश राज्य के लिए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के तहत कुल 24 क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) और 26 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (आईपीएचएल) को मंज़ूरी दी थी, जिनकी अनुमानित लागत 647.51 करोड़ रुपये है।
क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) को मंज़ूरी इसलिए दी गई थी, ताकि गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों के लिए बेहतर स्वास्थ्य आधारित ढ़ांचा बनाया जा सके और उन्हें समय पर बेहतर इलाज मिल सके, खासकर महामारी, आपदा और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति के दौरान। इस पहल का मकसद ज़िला अस्पतालों में अच्छी सुविधाओं वाले क्रिटिकल केयर सेंटर बनाकर इंटेंसिव केयर सेवाओं में कमियों को दूर करना, इमरजेंसी के लिए बेहतर तैयारी करना, मृत्यु दर कम करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता और मज़बूती को बढ़ाना है।
इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (आईपीएचएल) को मंज़ूरी इसलिए दी गई थी, ताकि देश भर में बीमारी की निगरानी मज़बूत हो, जांच की क्षमता बढ़े और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति प्रतिक्रिया बेहतर हो। इन प्रयोगशालाओं का मकसद ज़िला स्तर पर संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों की पूरी और समय पर जांच करना है, जिससे बीमारियों के फैलने का जल्दी पता चल सके, सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरों की बेहतर निगरानी हो सके और सबूतों के आधार पर फैसले लिए जा सकें।
10 सीसीबी का सिविल काम पूरा हो गया है और आज उनका उद्घाटन किया गया। 26 आईपीएचएल का सिविल काम पूरा हो गया है और 14 आईपीएचएल पहले ही चालू हो चुके थे, जबकि बाकी 12 आईपीएचएल का उद्घाटन आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने किया।


