चंडीगढ़ की विद्युत वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) ने सेक्टर 1 से 8 तक 11 केवी की ओवरहेड विद्युत वितरण प्रणाली को सफलतापूर्वक भूमिगत केबल नेटवर्क में परिवर्तित कर दिया है।
लगभग 25,000 निवासियों को लाभ पहुंचाने वाली ₹12 करोड़ की इस परियोजना का उद्घाटन आज पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक, यूटी चंडीगढ़, श्री गुलाब चंद कटारिया ने किया। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री संजय टंडन भी उपस्थित रहे।
इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले सीपीडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ब्रजेश कुमार ने राज्यपाल का स्वागत किया।
यह परियोजना चंडीगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत बुनियादी ढांचे के व्यापक उन्नयन का प्रतीक है। इन क्षेत्रों में पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, रॉक गार्डन और सुखना झील सहित कई प्रमुख सरकारी संस्थान, पर्यटन स्थल और आवासीय क्षेत्र शामिल हैं।
इस अवसर पर श्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा, “चंडीगढ़ देश का पहला केंद्रशासित प्रदेश है, जहां विद्युत वितरण व्यवस्था निजी क्षेत्र को सौंपी गई है। सीपीडीएल को यह जिम्मेदारी विद्युत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और वितरण व्यवस्था में सुधार की अपेक्षा के साथ दी गई थी। यह परियोजना उस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
“ओवरहेड विद्युत लाइनें मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं और किसी तकनीकी खराबी के कारण क्षेत्र में कई घंटों तक विद्युत आपूर्ति बाधित हो सकती है। 18 किलोमीटर लंबे नेटवर्क को भूमिगत करने और इसे कई फीडरों के माध्यम से कमांड सेंटर से जोड़ने से यह जोखिम काफी कम होगा। यदि किसी एक लाइन में खराबी आती है तो रिमोट प्रणाली के माध्यम से विद्युत भार को दूसरी लाइन पर स्थानांतरित कर कम-से-कम समय में आपूर्ति बहाल की जा सकेगी। इससे विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और बिजली चोरी पर नियंत्रण भी मजबूत होगा।
“आज कोई भी अस्पताल, विद्यालय या घर विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के बिना सुचारु रूप से कार्य नहीं कर सकता। सीपीडीएल ने शहर के विद्युत नेटवर्क के लिए ₹900 करोड़ से अधिक के निवेश की योजना बनाई है, जिसमें भूमिगत केबलिंग एक प्रमुख घटक है। यह पहल सिटी ब्यूटीफुल की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ विद्युत सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत करेगी।”
परियोजना के अंतर्गत लगभग 18 किलोमीटर लंबी 11 केवी भूमिगत केबल बिछाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, वन क्षेत्र से गुजरने वाले चार वितरण फीडरों पर 14 स्काडा-नियंत्रित रिंग मेन यूनिट्स (आरएमयू) स्थापित की गई हैं।
सीपीडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ब्रजेश कुमार ने कहा, “यह परियोजना प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के माध्यम से चंडीगढ़ की विद्युत वितरण व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए सीपीडीएल के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। सुदृढ़ नेटवर्क से परिचालन क्षमता में सुधार होगा, शहर की बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी तथा चंडीगढ़ को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार शहर बनाने में योगदान मिलेगा। हम उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और बेहतर गुणवत्ता वाली विद्युत आपूर्ति प्रदान करने वाले बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
भूमिगत केबल प्रणाली से चंडीगढ़ के विद्युत नेटवर्क की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे तूफान, तेज हवाओं, पेड़ों के उखड़ने और अन्य बाहरी कारणों से होने वाली विद्युत बाधाओं में कमी आएगी।
उन्नत नेटवर्क की एक प्रमुख विशेषता आरएमयू का रिमोट संचालन है। इससे सेक्टर 18 स्थित सीपीडीएल कमांड सेंटर के माध्यम से विद्युत भार को एक फीडर से दूसरे फीडर पर स्थानांतरित किया जा सकेगा। यह व्यवस्था विद्युत बाधाओं की अवधि और प्रभाव को कम करने के साथ-साथ आपात स्थितियों में आपूर्ति को तेजी से बहाल करने में सहायक होगी।
क्षेत्र की संवेदनशील प्रकृति के कारण परियोजना के क्रियान्वयन में वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने और सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों का पालन करने सहित कई तकनीकी एवं परिचालन चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद सीपीडीएल ने गुणवत्ता, सुरक्षा और परिचालन विश्वसनीयता के कड़े मानकों का पालन करते हुए परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया।
भूमिगत विद्युत नेटवर्क से पर्यावरणीय और सौंदर्य संबंधी लाभ भी होंगे। ओवरहेड विद्युत खंभों और तारों को हटाने से विशेष रूप से रॉक गार्डन और सुखना झील के आसपास का शहरी परिदृश्य अधिक स्वच्छ और सुंदर बनेगा। इससे झील के आसपास प्रवासी पक्षियों और वन्यजीवों के लिए ओवरहेड विद्युत ढांचे से उत्पन्न जोखिम भी कम होगा।
शहर के विद्युत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की अपनी व्यापक प्रतिबद्धता के तहत सीपीडीएल ने पांच वर्षों में ₹956 करोड़ के निवेश की योजना तैयार की है। इसमें नेटवर्क सुधार, आपूर्ति की विश्वसनीयता, स्मार्ट मीटरिंग, सुरक्षा और डिजिटल पहलों को शामिल किया गया है।
1 फरवरी, 2025 को विद्युत वितरण प्रणाली संभालने के बाद से सीपीडीएल शहर के विद्युत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सुरक्षा बढ़ाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इन प्रयासों के तहत कंपनी ने चार 20 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर, 63 वितरण ट्रांसफॉर्मर और 40 आरएमयू को ऊर्जीकृत किया है। इसके अतिरिक्त, 15 किलोमीटर हाई-टेंशन सर्किट और 25 किलोमीटर लो-टेंशन सर्किट का कार्य भी पूरा किया गया है।
सीपीडीएल द्वारा चौबीसों घंटे संचालित इन-हाउस स्काडा कमांड सेंटर के माध्यम से विद्युत नेटवर्क की रियल-टाइम निगरानी, बिजली आपूर्ति का निर्धारण और आरएमयू का रिमोट संचालन किया जा रहा है। इससे विद्युत आपूर्ति का अधिक तेज और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है।
कार्यक्रम के अंत में सीपीडीएल के वरिष्ठ सलाहकार श्री अरुण कुमार वर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।


