हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के नियम 16 के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति का गठन किया गया है। यह कमेटी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन, पीड़ितों को प्रदान की गई राहत एवं पुनर्वास, अधिनियम के अंतर्गत मामलों के अभियोजन, कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी विभिन्न अधिकारियों/एजेंसियों की भूमिका तथा राज्य सरकार को प्राप्त रिपोर्टों की समीक्षा करती है।
श्री बेदी विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार एवं पुलिस द्वारा राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अपराधों को कम करने के लिए अनेक कारगर कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति के पीड़ित परिवारों को कानूनी हक दिलवाने के लिए फीस बढ़ाकर 21 हजार रुपए करने का कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठ का गठन किया गया है, जिसकी निगरानी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती है। यह प्रकोष्ठ पंजीकृत मामलों के समन्वय एवं अनुश्रवण का कार्य करता है। उन्होंने बताया कि जाति-आधारित अत्याचारों की सूचना मिलने पर मामलों के शीघ्र पंजीकरण तथा निष्पक्ष एवं न्यायसंगत जांच सुनिश्चित करने के लिए जिला एवं थाना स्तर पर विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जांच के सभी पहलुओं, जिसमें अभियुक्तों की समयबद्ध गिरफ्तारी भी शामिल है, को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर नियमित निगरानी की जाती है।
अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के अंतर्गत मामलों की जांच क्षेत्रीय इकाइयों में तैनात राजपत्रित अधिकारियों अर्थात उपपुलिस अधीक्षक/सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा की जा रही है। पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी क्षेत्रीय इकाइयों को निर्देश जारी किए गए हैं कि जांच अधिकारियों द्वारा जांच को समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाए।
श्री बेदी ने आगे कहा कि जिला स्तर पर जांच की प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा राज्य स्तर पर जारी निर्देशों का प्रभावी अनुपालन हो सके।
इसके अलावा पीड़ितों को मुआवजे/मौद्रिक राहत का समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी क्षेत्रीय इकाइयों को निर्देश जारी किए गए हैं कि मामला दर्ज होने के तुरंत बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रतियां पीड़ित तथा संबंधित जिला कल्याण अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएं, ताकि पीड़ितों को मौद्रिक राहत प्रदान की जा सके। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के संशोधन अधिनियम, 2015 एवं 2018 तथा नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 को सभी प्रशिक्षण केंद्रों में आयोजित विभिन्न पदोन्नति पाठ्यक्रमों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अंतर्गत लंबित अनुसंधानाधीन मामलों के निस्तारण के लिए सभी क्षेत्रीय इकाइयों में समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं तथा ऐसे मामलों की प्रगति की पुलिस मुख्यालय स्तर पर नियमित रूप से निगरानी की जाती है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान हरियाणा में अनुसूचित जाति से संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अत्याचार के 1,020 मामले दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अंतर्गत, भा.न.स./भा.द.स. की किसी भी धारा का प्रयोग किए बिना 56 मामले दर्ज किए गए।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एवं हरियाणा पुलिस द्वारा ऐसे अपराधों की रोकथाम, मामलों के शीघ्र पंजीकरण एवं जांच तथा अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों की प्रभावी निगरानी एवं पर्यवेक्षण के लिए निरंतर उपाय किए जा रहे हैं। इनमें 60 दिन में चालान पेश किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
श्री बेदी ने बताया कि उक्त समिति की बैठक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है, जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाती है। मार्च, 2026 में एक माह का विशेष अभियान चलाया गया, जिसके दौरान विचाराधीन/अनुसंधानाधीन मामलों के शीघ्र निस्तारण हेतु विशेष प्रयास किए गए तथा 175 मामलों का निस्तारण किया गया।
इसके अतिरिक्त, सभी जिलों के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम से संबंधित नोडल अधिकारियों एवं अनुसंधान अधिकारियों की बैठकें पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में मामलों के पंजीकरण, अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार, आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, पीड़ितों की काउंसलिंग, मामलों के त्वरित निस्तारण, साक्ष्यों के संकलन तथा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाती है। इसके अलावा गांवों में जागरूकता अभियान आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत उनके अधिकारों एवं उपलब्ध कानूनी संरक्षण के संबंध में जागरूक किया जा सके।


