विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि विभाजन की त्रासदी झेलकर हरियाणा आए विस्थापित परिवारों ने विपरीत परिस्थितियों में अपने जीवन को दोबारा खड़ा करते हुए प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से पाकिस्तान से विस्थापित होकर हरियाणा आए पंजाबी समाज ने अपनी मेहनत, संघर्ष, उद्यमशीलता और संस्कारों से प्रदेश की विकास यात्रा को नई मजबूती दी। उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद बड़ी संख्या में परिवार हरियाणा में आए, जिनका प्रदेश के मूल निवासियों ने खुले मन से स्वागत किया और उन्हें समाज का अभिन्न हिस्सा बनाया। इन परिवारों ने भी हरियाणा को अपनी कर्मभूमि मानकर कृषि, व्यापार, उद्योग, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। आज हरियाणा की सामाजिक पहचान और समृद्धि में इन परिवारों की मेहनत और संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि विभाजन के बाद यहां आए पंजाबी समाज ने अपनी भाषा, खान-पान, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को हरियाणा की स्थानीय संस्कृति के साथ जोड़कर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को और व्यापक एवं समृद्ध बनाया। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा की पहचान अनेक संस्कृतियों के सुंदर समन्वय और आपसी भाईचारे के रूप में होती है। पंजाबी समाज की उद्यमशीलता और मेहनत ने प्रदेश को कृषि के साथ-साथ व्यापार, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने विस्थापित परिवारों को केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के अवसर भी दिए, जिसका प्रमाण प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी से मिलता है।
*देशभक्ति गीतों के बीच विभाजन की त्रासदी की यादें हुई ताजा, प्रदेशभर से बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़*
कार्यकम में देशभक्ति गीतों की धुन के बीच विभाजन की त्रासदी की यादें एक बार फिर ताजा हो गई और पूरा पांडाल भावुक हो उठा। कलाकारों ने विभाजन की त्रासदी को एक नाटक के माध्यम से बड़े ही मार्मिक ढंग से पेश किया, जिसने उस दौर के माहौल, पीड़ा और हालात को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए पूरे पांडाल को तालियों से गुंजायमान कर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आमजन ने हिस्सा लिया और देश के इतिहास के सबसे पीड़ादायक अध्यायों में से एक को याद किया।
*सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की प्रदर्शनी भी रही आकर्षण का केंद्र, लोगों ने की प्रशंसा *
विभाजन विभीषिका कार्यक्रम स्थल पर केंद्र सरकार और सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा लगाई गई विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रदर्शनी भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने प्रदर्शनी को बड़ी संख्या में देखा और विभाग के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा की। इस प्रदर्शनी में विभाजन के समय की दुर्लभ तस्वीरें, अखबारों के पुराने पन्ने और उस दौर के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए थे, जिन्हें देखकर लोग उस समय की परिस्थितियों को समझ पाए। कई लोगों ने प्रदर्शनी में लगी तस्वीरों के साथ सेल्फी भी क्लिक की और इसे एक सराहनीय पहल बताया।
*देशभक्ति गीतों पर तिरंगा हाथ में लेकर झूमे लोग*
कार्यक्रम की शुरुआत ही देशभक्ति गीतों से हुई, जिसने शुरू से ही माहौल को भावनात्मक बना दिया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोग हाथों में तिरंगा लेकर झूम उठे और हर किसी ने देशभक्ति गीतों को बड़े उत्साह के साथ गुनगुनाया। भारत माता की जय के जयकारों से पूरा पांडाल गूंज उठा और उपस्थित जनसमूह में एकता व राष्ट्रभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से देखी गई।
*मुख्य अतिथि ने स्मृति की दीवार पर दी श्रद्धांजलि*
कार्यक्रम स्थल पर विभाजन की त्रासदी को समर्पित एक विशेष स्मृति की दीवार भी बनाई गई थी, जिस पर त्रासदी से जुड़ी वे तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं, जो आज भी लोगों के जहन में जीवंत हैं। कार्यक्रम के समापन के उपरांत मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन और केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल स्मृति की दीवार पर पहुंचे और वहां पुष्पांजलि अर्पित कर विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोगों को नमन किया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने भी मौन रहकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


