कृषि मंत्री श्री मंत्री श्याम सिंह राणा ने शहीदी दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि भारत माता के अमर सपूत, महान क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं और अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उन्होंने कहा कि शहीद ऊधम सिंह का जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, आत्मसम्मान और राष्ट्रप्रेम की अमर गाथा है। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों के सामने कभी हार नहीं मानी। इसलिए उनका जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियाँ किसी महान व्यक्तित्व के निर्माण में बाधा नहीं, बल्कि प्रेरणा बन सकती हैं।
उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल,1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड में अंग्रेजी हुकूमत ने गोलियां बरसाकर हजारों निहत्थे लोगों को शहीद किया था उस भयावह नरसंहार से प्रभावित होकर युवा ऊधम सिंह के हृदय में उस दिन यह संकल्प जन्मा कि निर्दाेष भारतीयों के रक्त का हिसाब अवश्य लिया जाएगा। उन्होंने कई वर्षों तक धैर्य, साहस और दृढ़ निश्चय के साथ अपने संकल्प को जीवित रखने उपरांत 13 मार्च,1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओड्वायर को गोली मारकर जलियांवाला बाग के शहीदों के प्रति अपना प्रण पूरा किया। इसके बाद अंग्रेजी सरकार ने 31 जुलाई, 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई। उन्होंने कहा कि भारत उन महान बलिदानों की नींव पर खड़ा है, जिसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने रक्त से सींचा। हमारा कर्तव्य है कि हम उनके सपनों के भारत का निर्माण करें – एक ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर हो, समृद्ध हो, शिक्षित हो, वैज्ञानिक सोच वाला हो और सामाजिक समरसता से परिपूर्ण हो।


