Close Menu
Rozana Desh PardeshRozana Desh Pardesh
    What's Hot

    एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की गुरुग्राम में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

    July 24, 2026

    नागरिकों की शिकायतों का प्राथमिकता से किया जाए निवारण- लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा

    July 24, 2026

    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत-रोमानिया व्‍यापार मंच को संबोधित किया

    July 24, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Breaking News
    • एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की गुरुग्राम में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
    • नागरिकों की शिकायतों का प्राथमिकता से किया जाए निवारण- लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा
    • भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत-रोमानिया व्‍यापार मंच को संबोधित किया
    • प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है।
    • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन या भव्य-रसायन योजना को मंजूरी दी है।
    • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोनम वांगचुक से डॉक्टरों की सलाह मानने का आग्रह किया और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की
    • केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने गुंटूर में आधुनिकीकृत जन सेवा कनेक्ट डाकघरों का उद्घाटन किया
    • खदान बंद करना सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में भारत में परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण पहल : डॉ. जितेन्द्र सिंह
    Saturday, July 25
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Rozana Desh PardeshRozana Desh Pardesh
    Advertise With Us Epaper
    • ਮੁੱਖ ਪੰਨਾ
    • ਪੰਜਾਬ
    • ਹਰਿਆਣਾ
    • ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ
    • ਰਾਸ਼ਟਰੀ
    • ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ
    • ਵਪਾਰ
    • ਰਾਜਨੀਤੀ
    • ਮਨੋਰੰਜਨ
    • ਖੇਡਾਂ
    • ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ
    • ਸੰਪਰਕ
    Rozana Desh PardeshRozana Desh Pardesh
    ਈ-ਪੇਪਰ
    Home»National»खदान बंद करना सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में भारत में परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण पहल : डॉ. जितेन्द्र सिंह
    National

    खदान बंद करना सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में भारत में परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण पहल : डॉ. जितेन्द्र सिंह

    July 24, 20267 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram Email WhatsApp

    खदान बंदी को भारत की सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में परिवर्तन की यात्रा की एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज कहा कि भारत संसाधन रहित खदानों को संपदा सृजन, पर्यावरण पुनर्स्थापन और स्थायी आजीविका के नए केन्द्रों में बदलकर खदान बंदी की पूरी अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

    वैज्ञानिक खदान बंदी को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नवाचार-आधारित शासन की कल्पना का मूर्त रूप बताते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि बंद हो चुकी खदान को अब आर्थिक गतिविधियों के अंत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे विकास की एक नई यात्रा की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए, जो लोगों और पर्यावरण—दोनों के हित में हो।

    डॉ. जितेन्द्र सिंह नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित “आरोह—खदान बंदी पर वार्षिक रिपोर्ट” जारी किये जाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कोयला कंपनियों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता और अंतरराष्ट्रीय साझेदार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान कोयला नीर संयंत्रों का वर्चुअल उद्घाटन, बंद कोयला खदानों पर तकनीकी सहयोग के लिए कोयला मंत्रालय और जीआईजैड के बीच कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर तथा कोयला-बहुल क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करने हेतु त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए।

    इस पहल को भारत की सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में परिवर्तन की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक खदान बंदी एक साथ कई राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाती है, जिनमें कचरे से संपदा सृजन, संसाधन दक्षता, पर्यावरण संरक्षण, सतत भूमि उपयोग और सामुदायिक विकास शामिल हैं। उन्होंने कहा, “आपने एक कोयला खदान को बंद किया है और संपदा की एक दूसरी खदान खोल दी है।” उन्होंने इस पहल को इस बात का सशक्त उदाहरण बताया कि कैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी उन परिसंपत्तियों से नए आर्थिक अवसरों को उजागर कर सकती है, जिन्हें लंबे समय से समाप्त मान लिया गया था।

    मंत्री ने कहा कि इस तरह की परिवर्तनकारी सोच इसलिए संभव हो पाई है क्योंकि वर्तमान सरकार पारंपरिक तरीकों तक सीमित रहने के बजाय नवाचार को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्थानों को स्थापित प्रथाओं को चुनौती देने और ऐसे साहसिक, भविष्य-दृष्टि वाले समाधान अपनाने के लिए लगातार प्रेरित किया है, जो देश को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खदान बंदी इसी तरह का एक नीतिगत नवाचार है, जिसमें पर्यावरणीय जिम्मेदारी को आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के साधन में बदल दिया गया है।

    डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह पहल वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करते हुए यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण की बहाली की दिशा में भी प्रगति हो। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों का विस्तार कर रहा है, प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग और उनकी फिर से उत्पत्ति समान रूप से स्थायी विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रगति का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि संसाधनों का कितनी दक्षता से उपयोग किया गया, बल्कि इस आधार पर भी किया जाना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उन्हें कितनी जिम्मेदारी से पुन: स्थापित किया गया।

    आरोह में शामिल वैज्ञानिक रूप से बंद 42 खदानों के माध्यम से दर्ज किए गए परिवर्तन की सराहना करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि ये उदाहरण भारत में खनन के बाद भूमि उपयोग के भविष्य के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि खनन के बाद फिर से तैयार क्षेत्रों को कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, कौशल विकास और अन्य समुदाय-केन्द्रित पहलों को बढ़ावा देकर आर्थिक गतिविधियों के केन्द्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, विशेषकर महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने का भी सुझाव दिया, ताकि वैज्ञानिक खदान बंदी के माध्यम से स्थायी आजीविका के अवसर सृजित होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा सके।

    कोयला मंत्रालय और जर्मनी की जीआईजैड के बीच हुए कार्यान्वयन समझौते का स्वागत करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सतत विकास तेजी से ऐसे सहयोगात्मक साझेदारियों पर निर्भर होता जा रहा है, जो वैश्विक विशेषज्ञता को स्थानीय नवाचार के साथ जोड़ती हैं। उन्होंने इस समझौते को एक ऐसे मॉडल के रूप में बताया, जो वैज्ञानिक खदान बंदी और भूमि के पुनः उपयोग में तेजी लाने के लिए सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योग को एक साथ ला सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोगात्मक ढांचे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में दोहराए जा सकने वाले मॉडल बनने की क्षमता रखते हैं।

    मंत्री ने जोर देकर कहा कि सफल सार्वजनिक पहलों के बारे में इस तरह से संवाद किया जाना चाहिए, जिससे व्यापक जनभागीदारी को प्रेरणा मिले। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत दृश्य दस्तावेजीकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि वैज्ञानिक रूप से पुनर्स्थापित की गई प्रत्येक खदान पर लघु डिजिटल फिल्में तैयार की जानी चाहिए, ताकि देशभर के नागरिक, प्रशासक और हितधारक इन बदलावों को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह के कथानक भारत के खदान बंदी अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर सीखने का एक महत्वपूर्ण संसाधन बना सकते हैं और अन्य क्षेत्रों में इसी तरह के नवाचारों को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

    अन्य क्षेत्रों की सफल पहलों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सड़क निर्माण में स्टील स्लैग के उपयोग और इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल को जैव ईंधन में परिवर्तित करने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों पहल शुरुआत में असामान्य प्रतीत होती थीं, लेकिन बाद में मूल्यवान आर्थिक संसाधनों में विकसित हो गईं। उन्होंने कहा कि ये अनुभव दर्शाते हैं कि विज्ञान-आधारित नवाचार में कचरे को संपदा में बदलने की शक्ति है और साथ ही यह जन-जागरूकता, पर्यावरणीय लाभ तथा नए आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि यही दर्शन वैज्ञानिक खदान बंदी के केन्द्र में है, जहां कल की समाप्त परिसंपत्तियां कल के सतत विकास के इंजन बन जाती हैं।

    कोयला मंत्रालय वैज्ञानिक खदान बंदी के लिए एक व्यापक ढांचे को लागू कर रहा है, जो पारिस्थिति की बहाली को, सामुदायिक विकास और खनन के बाद भूमि के दीर्घकालिक उपयोग को जोड़ता है। “आरोह—खदान बंदी पर वार्षिक रिपोर्ट” में विस्तृत केस स्टडी, पहले और बाद के दस्तावेजीकरण तथा डिजिटल संसाधनों के माध्यम से 42 खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने की भारत की यात्रा को दर्ज किया गया है। साथ ही, इसमें भविष्य की खदान बंदी पहलों के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को भी प्रस्तुत किया गया है। इन प्रयासों को संशोधित खदान बंदी दिशानिर्देशों, रीक्लेम, लाइव्स और सुविकल्प ढांचों, खदान के पानी के उत्पादक उपयोग के लिए कोयला नीर संयंत्रों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समुदाय-केन्द्रित विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई साझेदारियों का भी समर्थन प्राप्त है। सामूहिक रूप से, ये पहल यह दर्शाती हैं कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि खनन का प्रत्येक चरण स्थायी और समावेशी राष्ट्रीय विकास में योगदान दे।

    Share. Facebook Twitter Pinterest Email WhatsApp

    Related Posts

    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत-रोमानिया व्‍यापार मंच को संबोधित किया

    July 24, 2026

    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है।

    July 24, 2026

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन या भव्य-रसायन योजना को मंजूरी दी है।

    July 24, 2026
    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Join Us
    • Facebook
    • Twitter
    • Instagram
    • YouTube
    https://rozanadeshpardesh.com/wp-content/uploads/2026/05/01-05-2026.pdf
    • Business
    • Chandigarh
    • Entertainment
    • Haryana
    • International
    • National
    • Politics
    • Punjab
    • Sports
    • Technology
    Latest News

    एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की गुरुग्राम में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

    July 24, 2026

    नागरिकों की शिकायतों का प्राथमिकता से किया जाए निवारण- लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा

    July 24, 2026

    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत-रोमानिया व्‍यापार मंच को संबोधित किया

    July 24, 2026

    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है।

    July 24, 2026

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन या भव्य-रसायन योजना को मंजूरी दी है।

    July 24, 2026
    Facebook X (Twitter) WhatsApp Instagram YouTube

    About

    Welcome to Rojana Desh Pardesh, your trusted source for real-time news, in-depth analysis, and insightful stories from around the world. We cover politics, technology, business, entertainment, and more—bringing you accurate and fact-checked updates 24/7. Stay informed, stay ahead!

    Quick Links

    • Home
    • About Us
    • Epaper
    • Advertise With Us
    • Classified
    • Contact Us

    Categories

    • Punjab
    • National
    • International
    • Business
    • Politics
    • Entertainment
    • Sports

    Latest News

    एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की गुरुग्राम में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

    July 24, 2026

    नागरिकों की शिकायतों का प्राथमिकता से किया जाए निवारण- लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा

    July 24, 2026

    © 2026 Razana Desh Pardesh. All Rights Reserved 

    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.