उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में जागरूक समाज और जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के उस दूरदर्शी प्रयास की सराहना की, जिसके तहत पहली बार सीपीए इंडिया को नौ जोनों में विभाजित कर संसदीय संवाद को अधिक सक्रिय, नियमित और व्यवस्थित बनाया गया है।
श्री हरिवंश ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब देश के सभी क्षेत्रों का संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर क्षेत्र के राज्यों का इस लक्ष्य की प्राप्ति में विशेष योगदान है। पंजाब और हरियाणा देश के कुल गेहूं उत्पादन में लगभग एक-चौथाई योगदान देकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के मजबूत स्तंभ बने हुए हैं। देश के कुल भू-भाग का मात्र 1.3 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद हरियाणा राष्ट्रीय जीडीपी में 3.6 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा राज्य को ‘1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ बनाने के लक्ष्य तथा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 2000 करोड़ रुपये के फंड के साथ स्थापित देश के पहले ‘डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर’ की विशेष रूप से सराहना की।
भविष्य की जटिल तकनीकी एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए
उपसभापति ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को तात्कालिक राजनीतिक चिंताओं से ऊपर उठकर दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज और विधायकों को मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, पराली प्रबंधन, जल संकट तथा तीव्र शहरीकरण जैसी उभरती चुनौतियों का सामना साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (एविडेंस-बेस्ड पॉलिसीमेकिंग) और विशेषज्ञों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से करना होगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन क्षेत्रों ने कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेलों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
श्री हरिवंश ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्टार्टअप, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधार, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाओं ने सुशासन, पारदर्शिता और सेवा वितरण को नई दिशा प्रदान की है। आज भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है तथा वैश्विक मंच पर एक विश्वसनीय और सक्षम साझेदार के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक और दूरगामी सुझावों का मार्ग प्रशस्त करेगा।


